बच्चों की अच्छी शिक्षा, दीक्षा, परिवार का पेट पालने के लिए गांव छोड़कर तो शहर में आकर बसे। खून पसीना एक कर पाई पाई जोड़ी और अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम में मकान खरीदा। सोचा था कि कम से कम सर छिपाने को खुद की छत तो नसीब हुई। यहां यूआईटी प्रशासन ने हमें आबाद तो कर दिया, फ्लैट का मालिकाना हक भी दे दिया, लेकिन अभी तक भी यहां कई मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। यह पीड़ा है प्रेम नगर अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम के बाशिन्दों की। 'पत्रिका' टीम यहां पहुंची तो लोगों ने खलकर अपना दर्द बयां किया।