
फार्महाउस और महिला किसान सुशीला की फोटो: पत्रिका
Strawberry Farming In Rajasthan: स्ट्रॉबेरी पहाड़ी क्षेत्रों की फसल मानी जाती है लेकिन अब रावतभाटा में भी इसकी खेती शुरू हो गई। महिला किसान सुशीला निषाद की पांच सालों की मेहनत अब रंग लाई है। भैंसरोडगढ़ के समीप उनके फार्म हाउस पर स्ट्रॉबेरी की फसल लहलहा रही है। खरीदार फार्म हाउस पहुंच रहे है। कोटा मंडी तक उनकी स्ट्रॉबेरी की मांग है।
शुरुआत में फसल का मुनाफा उम्मीद के मुताबिक नहीं हुआ, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। महाबलेश्वर से वह पौध मंगाकर खेती कर रही हैं। आधुनिक खेती के बावजूद फसल की कम क़ीमत मिलने पर उनके मन में कसक तो है पर हिम्मत में कोई कमी नहीं। कृषि वैज्ञानिकों की सलाह और सम्पर्क से वह आगे बढ़ती जा रही है। फार्म हाउस पर ही एक कमरे पर उनका परिवार स्ट्रॉबेरी की छंटाई और पेकिंग में सहायता करता है।
स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए फार्म हाउस पर ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिससे पौधों को पर्याप्त नमी मिलती है और उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर रहती है। मौसम के अनुसार सिंचाई और पोषक तत्वों का विशेष ध्यान रखा जाता है। सुशीला का कहना है कि अच्छी गुणवत्ता के कारण स्थानीय बाजार के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों से भी लोग सीधे फार्म हाउस पहुंचकर स्ट्रॉबेरी खरीद रहे हैं। उनका लक्ष्य भविष्य में उत्पादन बढ़ाकर अधिक किसानों को इस खेती के लिए प्रेरित करना है।
सुशीला निषाद की पारिवारिक पृष्ठभूमि कृषि आधारित होने से विवाह के बाद परमाणु बिजलीघर कॉलोनी में वह बंधी नहीं रही। भैंसरोडगढ़ के पास जमीन खरीद कर फार्म हाउस बनाया और कुछ अलग करने की ठान ली। निम्बाहेड़ा तहसील के कनेरा गांव में स्ट्रॉबेरी की खेती होने की जानकारी मिली तो पति के साथ साइट विजिट किया। क्लाइमेट का पता किया तो कनेरा की तरह ही यहां भी 20 से 30 डिग्री तापमान होना पाया गया।
यह तापमान स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए मुफिद होता है। शुरुआत 12 हज़ार पौधे लगाकर की। पांच सालों में यह बढ़कर 30 हज़ार हो गए है। पहले साल विंटर किस्म लगाई। दूसरे साल फैलविया, नवेला और केमरोज़ा किस्म लगाई। इस बार मलीशा किस्म की पौध लगाई इसके फल अच्छे मीठे और टिकाऊ है।
Updated on:
07 Aug 2026 01:58 pm
Published on:
07 Aug 2026 01:58 pm
