
कोटा. गांव में जाकर मरीजों को चिहिन्त कर उनका ऑपरेशन करना मोबाइल सर्जिकल यूनिट का काम है, लेकिन मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
कोटा . कोटा संभाग में दूरदराज के गांव-गांव में जाकर मरीजों को चिहिन्त कर उनका ऑपरेशन करना मोबाइल सर्जिकल यूनिट का काम है, लेकिन मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। वर्तमान में मोबाइल सर्जिकल यूनिट शोपिस बनी है। बीमारियों के समय भी चिकित्सा विभाग इसका उपयोग नहीं कर रहा है।
मोबाइल सर्जिकल यूनिट विज्ञान नगर स्थित शहरी स्वास्थ्य केन्द्र में स्थापित है। इसकी एक एम्बुलेंस लगी है। उसमें चिकित्सक टीम गांव-गांव जाकर मरीजों को चिहिन्त कर उनका उपचार व ऑपरेशन करती है, लेकिन चार माह से यह सर्जिकल यूनिट शोपिस बनी है। इस यूनिट की टीम को 15 सितम्बर तक सर्वे कर मरीजों को चिहिन्त करना था, लेकिन अभी तक सर्वे भी नहीं हुआ।
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इस यूनिट का यह है काम
मोबाइल सर्जिकल यूनिट में हर्निया, कोर्निया, पाइलस, महिला के बच्चेदानी समेत अन्य सर्जिकल मरीजों को चिहिन्त कर उनका स्थानीय स्तर पर स्कूल या सामुदायिक केन्द्र पर शिविर लगाकर उपचार कर ऑपरेशन करना होता है। इसके बाद दवाइयां नि:शुल्क दी जाती है। इसके लिए सीएमएचओ समेत आठ वरिष्ठ चिकित्सकों की टीम नियुक्त है।
एनजीओ नहीं आ रहा आगे
इसमें खास बात सामने आई है कि यूनिट को गांवों में शिविर लगाने के लिए एनजीओ नहीं मिल पा रहा है। एनजीओ का काम शिविर में आने वाले मरीजों के लिए खान-पान की व्यवस्था करना होता है। एनजीओ नहीं आने के कारण यूनिट भी काम नहीं कर रही है। बारां जिले के शाहबाद जैसे आदिवासी जगहों पर यूनिट हर साल बड़ी संख्या में मरीजों के सर्जरी के ऑपरेशन करती है, लेकिन वहां भी एनजीओ नहीं मिलने के कारण शिविर नहीं लग पाया है।
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मोबाइल सर्जिकल यूनिट प्रभारी डॉ. केजी सिंघल का कहना है कि कोटा संभाग में एनजीओ नहीं मिलने के कारण शिविर लगाने का प्रोग्राम नहीं बना है। सीएससी को हमने पत्र जारी कर रखे है, लेकिन वहां से भी हमें मरीज की जानकारी नहीं दी जा रही है। जैसे ही एनजीओ सामने आएंगे हम शिविर लगाएंगे।
Published on:
19 Sep 2017, 6:43 PM IST
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