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खुलासा: छात्रसंघ अध्यक्ष प्रत्याशी ने 30 लाख में बनवाई थी जाली मार्कशीट, फर्जीवाड़े में शामिल थे कोटा और जीवाजी यूनिवर्सिटी के अफसर!

kota University, Gwalior University, Student Elections: कोटा विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाने के लिए विक्रम के फर्जी दस्तावेज बनवाने का सौदा 30 लाख रुपए में हुआ था।
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कोटा

•

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Zuber Khan

•

Aug 30, 2019

 Vikram Nagar kota Univarsity

खुलासा: छात्रसंघ अध्यक्ष प्रत्याशी ने 30 लाख में बनवाई थी जाली मार्कशीट, फर्जीवाड़े में शामिल थे कोटा और जीवाजी यूनिवर्सिटी के अफसर!

विक्रम नागर को दो साल से बचा रहे थे कोटा विवि के अफसर और कोर्स कॉर्डिनेटर
विनीत सिंह@कोटा. कोटा विश्वविद्यालय ( kota University) छात्रसंघ ( Student union elections) के अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाने के लिए विक्रम नागर के फर्जी दस्तावेज ( fake documents ) बनवाने का सौदा 30 लाख रुपए में हुआ था। दाखिला लेने और चुनावी पर्चा दाखिल करने के लिए बनवाई गईं दोनों फर्जी मार्कशीट ( Fake marksheets )और माइग्रेशन सर्टिफिकेट में जीवाजी विश्वविद्यालय ( Jiwaji University ) के असली कागज इस्तेमाल किए गए थे। इतना ही नहीं कोटा विवि के अफसरों और कोर्स कॉर्डिनेटर को फर्जी दस्तावेजों की पूरी जानकारी थी, लेकिन वह कार्रवाई करने के बजाय खुद आरोपी छात्र को बचाने में जुट गए।

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सूत्रों के मुताबिक विक्रम नागर को दो साल से छात्रसंघ अध्यक्ष बनाने की कोशिश की जा रही थी। इसके लिए बकायदा 30 लाख रुपए भी तीनों भागीदारों ने एकत्रित किए। जिससे उसकी फर्जी मार्कशीटें बनवाने से लेकर चुनाव प्रचार तक का खर्च उठाया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि ग्वालियर के जीवाजी विवि और कोटा विवि के अफसरों को अपनी ओर मिलाने के लिए कोटा के दो विधायकों और एक पूर्व विधायक के नाम का भी खूब इस्तेमाल किया गया। जीवाजी विवि के अधिकारियों को तो इन तीनों राजनेताओं के नाम से गुरुवार दोपहर तक धमकाया जाता रहा।

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दो साल से बचा रहे अफसर
माफिया विक्रम नागर को वर्ष 2018 में ही कोटा विवि के छात्रसंघ का अध्यक्ष बनवाना चाहता था। इसके लिए मोनार्ड यूनिवर्सिटी की अंकतालिका का इस्तेमाल कर उसे शैक्षणिक सत्र 2016-17 में एमएसडब्ल्यू पाठ्यक्रम में दाखिला दिलवाया गया, लेकिन परीक्षा विभाग ने जब उसके दस्तावेजों को संदिग्ध बताया तो कोर्स कॉर्डिनेटर विक्रांत शर्मा को मजबूरन उसके दस्तावेजों की जांच कराने के लिए तीन सदस्यीय स्थाई समिति को पत्र लिखना पड़ा। मोनार्ड यूनिवर्सिटी का मामला फंसता देख विक्रम नागर ने इस साल एमए लोक प्रशासन विषय में दाखिला ले लिया। उसने आवेदन में जीवाजी विश्वविद्यालय से दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम के जरिए बीए पास करने की फर्जी मार्कशीट लगाई थी।

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कार्रवाई करने से रोका
एमएसडब्ल्यू और एमए लोक प्रशासन के कोर्स कॉर्डिनेटर विक्रांत शर्मा ने बताया कि उन्होंने स्थाई समिति को लिखित पत्र देकर मोनार्ड यूनिवर्सिटी के दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की थी। अगले साल विक्रम नागर ने एमए लोक प्रशासन में दाखिला लिया तो जीवाजी यूनिवर्सिटी की बीए की मार्कशीट लगा दी। तीनों साल की अंकतालिकाएं अलग-अलग होने और अंकों में अंतर होने पर डॉक्यूमेंट फर्जी होने का अंदेशा हुआ था। जिसकी मौखिक जानकारी भी उन्होंने स्थाई समिति को दी थी, लेकिन उन्हें कार्रवाई करने से रोक दिया।

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दो राज्यों में फैला है गिरोह
कोटा विवि की दो सदस्यीय टीम ने गुरुवार को जब जीवाजी विवि के दस्तावेजों से विक्रम नागर की बीए प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष (अलग-अलग अनुक्रमांक की दो अंकतालिकाएं) और माइग्रेशन का मिलान किया तो दोनों विवि के अधिकारी चौंक गए। नागर के पांचों फर्जी डॉक्यूमेंट जीवाजी विवि में अधिकारिक तौर पर इस्तेमाल होने वाली स्टेशनरी से ही तैयार किए गए थे। माइग्रेशन पर तो अधिकारियों के दस्तखत हूबहू बना लिए गए थे। दोनों विवि के अधिकारियों ने माना कि फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोह के तार सीधे तौर पर जीवाजी यूनिवर्सिटी से जुड़े हुए हैं।


विक्रम के सारे दस्तावेज फर्जी हैं, इन्हें इतनी होशियारी से बनाया गया है कि यह हूबहू जीवाजी विवि के ही लग रहे हैं। चूंकि घटना का खुलासा कोटा विवि में हुआ है, इसीलिए उन्हें इस मामले में मुकदमा दर्ज कराना चाहिए।
डॉ. आईके मंसूरी, कुलसचिव, जीवाजी यूनिवर्सिटी ग्वालियर