15 मिनट के नाटक में पाना बाई के जीवन के पूरे संघर्ष, बेटों द्वारा किए गए परित्याग, पुलिस, सामाजिक संस्थाओं, मीडिया की भूमिका, बेटों के पश्चाताप, पानाबाई की बेटों द्वारा की गई घर वापसी आदि का मार्मिक मंचन किया गया। साथ ही संदेश दिया गया कि माता-पिता के असहाय होने पर उन्हें बेसहारा नहीं छोडऩा चाहिए। सकल दिगम्बर जैन समाज के महिला मंडल की निशा जैन ने बताया कि मंडल की सदस्याओं ने नाटिका में भूमिका निभाई।