
Strawberry कैसे लगाते हैं? (representative image) image credit Magnific
Strawberry Farming: बाजार में आज के समय में स्ट्रॉबेरी की मांग बढ़ रही है। लोग इसे सिर्फ एक सीजनल फल के तौर पर नहीं, बल्कि ओट्स, शेक, स्मूदी और कई दूसरी चीजों में डेली शामिल करके खाना पसंद कर रहे हैं। यही वजह है कि स्ट्रॉबेरी उगाने में लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है। इसे खेत के साथ साथ घर में भी गमले या कंटेनर में लगाया जा सकता है। ऐसे में अगर आप भी घर पर गमले में या खेती के लिए खेत में स्ट्रॉबेरी उगाना चाहते हैं तो यहां बताई गई बातों को ध्यान में रखकर उगा सकते हैं। आइए जानते हैं स्ट्रॉबेरी उगाने के लिए कैसी मिट्टी और मौसम चाहिए, पौधे कब लगाने चाहिए और सिंचाई से लेकर तुड़ाई तक किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) के अनुसार स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए बलुई दोमट से लेकर दोमट मिट्टी अच्छी मानी जाती है। मिट्टी में पानी ज्यादा देर तक जमा नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। इसके साथ ही स्ट्रॉबेरी के लिए मिट्टी का पीएच करीब 5.7 से 6.5 के बीच उपयुक्त माना गया है।
राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) के अनुसार स्ट्रॉबेरी ठंडे मौसम में अच्छी तरह बढ़ती है। हालांकि कुछ किस्मों को उपोष्ण क्षेत्रों में भी उगाया जा सकता है। इसलिए हर इलाके में एक ही किस्म और एक ही समय पर पौधे लगाना सही नहीं होता। पहाड़ी क्षेत्रों में स्ट्रॉबेरी के रनर या क्राउन लगाने का समय आमतौर पर सितंबर से अक्टूबर के बीच माना जाता है। लेकिन मैदानी और गर्म इलाकों में रोपाई का सही समय अलग हो सकता है।
राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) के अनुसार चैंडलर, टियोगा, टोरे, सेल्वा, बेलरुबी, फर्न और पजारो प्रमुख हैं। इसके अलावा प्रीमियर, रेड कोस्ट, फ्लोरिडा 90, पूसा अर्ली ड्वार्फ और ब्लेकमोर जैसी किस्में भी होती हैं। ऐसे में आप किस्म का चुनाव अपने इलाके के मौसम और पौधों की उपलब्धता के अनुसार कर सकते हैं।
घर में स्ट्रॉबेरी उगाने के लिए पर्याप्त गहराई और चौड़ाई वाला गमला या कंटेनर लें। गमले के नीचे पानी निकलने के लिए छेद जरूर होने चाहिए। पौधे को ऐसी जगह रखें, जहां उसे पर्याप्त रोशनी मिल सके। गमले में एक साथ बहुत ज्यादा पौधे लगाने से बचें। पौधे को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह दें और मिट्टी में पानी जमा न होने दें। पौधे की जरूरत के अनुसार पानी और पोषण देते रहें।
पौधों के बीच दूरी किस्म और खेती के तरीके पर निर्भर करती है। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) के अनुसार आम तौर पर करीब 30 सेंटीमीटर × 60 सेंटीमीटर की दूरी रखी जा सकती है। हालांकि इसके एक एकड़ मॉडल में 30 सेंटीमीटर × 30 सेंटीमीटर की दूरी का भी इस्तेमाल किया गया है।
राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) के अनुसार मिट्टी और फसल की जरूरत के हिसाब से स्ट्रॉबेरी में गोबर की खाद के साथ नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश दिया जा सकता है। खाद की सही मात्रा मिट्टी की जांच और फसल की स्थिति के आधार पर तय करना बेहतर रहता है।
राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) के अनुसार स्ट्रॉबेरी में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई का इस्तेमाल किया जा सकता है। खेत में ड्रिप सिंचाई से पौधों तक जरूरत के हिसाब से पानी पहुंचाना आसान होता है। गमले में पानी देते समय इस बात का ध्यान रखें कि पानी नीचे से निकल जाए। गमले में लगातार पानी जमा रहने से जड़ों को नुकसान हो सकता है।
राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) के अनुसार जब स्ट्रॉबेरी के फल का करीब आधे से तीन चौथाई हिस्सा रंग ले ले तो इसकी तुड़ाई की जा सकती है। मौसम और फसल की स्थिति के हिसाब से आमतौर पर दूसरे या तीसरे दिन फल तोड़े जा सकते हैं। इसके अलावा सुबह के समय फल तोड़ना बेहतर माना जाता है। ध्यान दें, स्ट्रॉबेरी जल्दी खराब होने वाला फल है। इसलिए तुड़ाई के बाद इसे ज्यादा देर तक गर्म जगह पर नहीं रखना चाहिए।
Updated on:
22 Sept 2026 04:42 pm
Published on:
22 Sept 2026 04:38 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
