
UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में विधान परिषद के लिए हुए चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा या बीजेपी) को ठीक टक्कर दी है। 11 में से छह सीटें बीजेपी ने जीतीं, जबकि बाकी पांच पर सपा ने झंडा गाड़ा। सपा ने दो नई सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि भाजपा एक नई सीट ही हासिल कर सकी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी सपा का कब्जा खत्म करने में बीजेपी सफल नहीं हो सकी, जबकि सपा ने भाजपा से लखनऊ स्नातक सीट छीन ली। वैसे विधान परिषद चुनाव की जीत-हार जनता का मूड आंकने का पैमाना नहीं है, फिर भी इसका सांकेतिक महत्व तो है ही। 2027 के विधान सभा चुनाव से कुछ महीने पहले मिली इस जीत से सपा का उत्साह बढ़ा है और उसका मानना है कि विधान सभा में भाजपा को हराना असंभव नहीं है। भाजपा के लिए जो अंदरूनी असंतोष और सत्ता विरोधी लहर जैसी चुनौतियां विधान सभा चुनाव में सामने आने वाली हैं, उससे निपटने में ज्यादा गंभीरता दिखाने का संदेश इस चुनाव परिणाम से लिया जा सकता है।
विधान परिषद चुनाव नतीजों से यह बात साबित हो गई है कि आने वाले विधान सभा चुनाव में भाजपा का मुक़ाबला सपा से ही होगा। सोशल मीडिया पर यह संकेत अभी से दिखाई देने लगा है और भाजपा के कई नेता अंदर ही अंदर यह मान भी रहे हैं कि सोशल मीडिया पर इस लड़ाई में उसकी ओर से सपा को करारा जवाब देने में चूक हो रही है। मीडिया में ऐसी खबरें आ रही हैं कि पार्टी की गोपनीय बैठकों में बीजेपी के कई नेता ऐसा आरोप लगा रहे हैं कि भाजपाई सोशल मीडिया पर योगी आदित्य नाथ पर सपा द्वारा किए जा रहे हमलों का माकूल जवाब नहीं दे रहे और न ही ही सीएम के पोस्ट की रीच बढ़ाने में सहयोग कर रहे हैं।
अंग्रेजी अखबार 'इंडियन एक्सप्रेस' के मुताबिक वाराणसी में 14-15 अक्तूबर को भाजपा के विस्तारकों, काशी क्षेत्र की 71 सीटों के प्रभारियों और गोरखपुर क्षेत्र के 62 क्षेत्रों के प्रभारियों की दो दिन की कार्यशाला आयोजित की गई थी। इसमें केंद्रीय नेताओं ने इस बात पर चिंता जाहिर की कि जिला स्तर के नेता और यहां तक कि विधायक भी मुख्यमंत्री और यूपी सरकार पर लगाए जाने वाले आरोपों और एआई से बनाए वीडियोज के जरिए किए जाने वाले हमलों का माकूल जवाब देने में बढ़-चढ़ कर हिस्सा नहीं लेते। अखबार ने वर्कशॉप में शामिल एक भाजपाई के हवाले से यहां तक लिखा है, 'इस पर चर्चा हुई कि सपा के कार्यकर्ता अखिलेश यादव के सोशल मीडिया पोस्ट्स को आगे बढ़ाने में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं, जबकि भाजपाई सीएम आदित्य नाथ और भाजपा के बचाव में उतना उत्साह नहीं दिखाते।'
ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि क्या सोशल मीडिया (एक्स) पर उत्तर प्रदेश (यूपी) के सीएम योगी आदित्य नाथ, समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव से पिछड़ रहे हैं? इस चर्चा के मद्देनजर जब हमने अखिलेश यादव और सीएम योगी के एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर नजर दौड़ाई तो बात में दम दिखा। हमने दोनों के करीब एक दर्जन पोस्ट्स का विश्लेषण किया। ये पोस्ट्स 28 अक्तूबर को दिन के 11 बजे से 29 अक्तूबर को 10 बजे के बीच किए गए थे।
पहले हमने 28 अक्तूबर को दिन के 11 से शाम छह बजे के बीच किए गए करीब आधा दर्जन पोस्ट्स पर नजर डाली। हमने देखा कि 28 अक्तूबर की शाम छह बजे तक योगी और अखिलेश में से ज्यादा कमेंट्स-रीट्वीट्स किनके पोस्ट्स पर हैं।
अखिलेश के पोस्ट्स पर रीट्वीट्स की संख्या क्रमशः 1400, 742, 616 और 451 थी। ये पोस्ट्स 7 घंटे, 6 घंटे और एक घंटा पहले किए गए थे। इसी अंतराल पर योगी आदित्य नाथ द्वारा किए गए ट्वीट्स की संख्या तीन थी और इन पर रीट्वीट्स की संख्या क्रमशः 247, 114, 84 थी।
इन पोस्ट्स पर कमेंट्स की बात करें तो जहां योगी के ट्वीट्स पर क्रमशः 88, 38 और 15 कमेंट्स थे, वहीं अखिलेश के चार ट्वीट्स पर 279, 138, 73 और 70 कमेंट्स थे।
29 अक्तूबर को दिन के दस बजे हम एक बार फिर दोनों नेताओं के एक्स हैंडल पर गए। दोनों के पांच ताजा ट्वीट्स पर कमेंट्स और रीट्वीट्स की संख्या देखी। सीएम योगी के पांच ताजा ट्वीट्स पर आए कमेंट्स की संख्या क्रमशः 61, 117, 60, 40 और 37 थी। अखिलेश यादव के मामले में यह संख्या 102, 7, 139, 100 और 13 रही।
रीट्वीट्स की बात करें तो योगी के पांच ट्वीट्स क्रमशः 146, 348, 314, 217 और 252 रीट्वीट हुए। वहीं, अखिलेश के मामले में यह संख्या क्रमशः 671, 60,702, 767 और 115 पाई गई।
वैसे इन आंकड़ों को सोशल मीडिया वार में योगी की हार के पुख्ता सबूत के रूप में नहीं लिया जा सकता, लेकिन इन्हें बीजेपी नेताओं द्वारा मीटिंग में जताई गई चिंता के सच होने के संकेत के रूप में जरूर लिया जा सकता है। एक्स पर फॉलोअर्स के मामले में सीएम योगी, पूर्व सीएम अखिलेश से कहीं आगे हैं। 29 अक्तूबर को दोपहर 12 बजे तक एक्स पर योगी के 32.7 मिलियन और अखिलेश के 20.4 मिलियन फॉलोअर्स थे। सीएम योगी ने 39.2 हजार पोस्ट्स कर रखे थे, जबकि सपा प्रमुख के पोस्ट्स की संख्या 14.6 हजार थी। अखिलेश जुलाई 2009 से एक्स पर हैं, जबकि योगी आदित्य नाथ ने सितंबर 2015 में अपना अकाउंट बनाया है। ऐसे में जाहिर है, सीएम योगी के पोस्ट्स की रीच ज्यादा होगी, लेकिन उनके पोस्ट्स पर कमेंट्स और रीपोस्ट की संख्या कम होने को हो सकता है भाजपा के केन्द्रीय नेता स्थानीय नेताओं की उदासीनता के रूप में देख रहे हैं।
| सैंपल के तौर पर देखे गए पोस्ट | नेता का नाम | रीट्वीट्स (Retweets) की संख्या | कमेंट्स (Comments) की संख्या |
| पहला पोस्ट | अखिलेश यादव | 671 | 102 |
| योगी आदित्यनाथ | 146 | 61 | |
| दूसरा पोस्ट | अखिलेश यादव | 60 | 7 |
| योगी आदित्यनाथ | 348 | 117 | |
| तीसरा पोस्ट | अखिलेश यादव | 702 | 139 |
| योगी आदित्यनाथ | 314 | 60 | |
| चौथा पोस्ट | अखिलेश यादव | 767 | 100 |
| योगी आदित्यनाथ | 217 | 40 | |
| पाँचवा पोस्ट | अखिलेश यादव | 115 | 13 |
| योगी आदित्यनाथ | 252 | 37 |
विधान सभा चुनाव से पहले सपा ने एक्स के जरिये सीएम योगी और यूपी सरकार पर हमले बढ़ा दिए हैं। इसके लिए एआई की जबरदस्त मदद ली गई है। एआई से बनाए गए कई वीडियो में मर्यादा की सीमा भी लांघी गई है। ऐसा दोनों पक्षों की ओर से हुआ है, लेकिन दोनों दल यह कह कर पल्ला झाड़ते रहे हैं कि ये वीडियो उनकी ओर से नहीं बनाए गए हैं।
Updated on:
29 Oct 2026, 1:54 PM IST
Published on:
29 Oct 2026, 12:07 PM IST
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