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मोबाइल Games के नशेबाज बच्चे 5 गुना बढ़े, विशेषज्ञों ने किया अलर्ट, हो सकता है खतरा

Study on Usage of Mobile: बच्चे मोबाइल फोन और गेम्स के नशेबाज होते जा रहे हैं। पिछले वर्षों की तुलना में पांच फीसदी बच्चों की बढ़ोत्तरी हुई है।
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लखनऊ

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Snigdha Singh

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Jun 09, 2022

मोबाइल गेम्स का नशा बच्चों और किशोरों में बेइंतहा बढ़ गया है। यह नशा बच्चों को आक्रामक के साथ चिड़चिड़ापन और अनिद्रा का शिकार बना रहा है इसलिए अब इस नशे को गंभीर मनोरोग की श्रेणी में रखा गया है। 5 गुना रफ्तार से मोबाइल गेम्स का नशा बढ़ा है। राजकीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की यूनिट ने तीन सालों की स्टडी में पाया है कि मोबाइल गेम्स खेलने का नशा बच्चों-किशोरों के साथ युवाओं को आक्रामक मानसिक विकार देने के साथ ही उत्तेजित और गुस्सैल बना रहे हैं। उनकी नींद और मानसिक विकास तक प्रभावित होने लगा है। हालात इतने खराब हो गए हैं कि बच्चों-किशोरों में आ रहे बदलाव को पैरेन्ट्स तक भांप नहीं पा रहे हैं, क्यों? इसलिए कि खुद भी मोबाइल में व्यस्त हो गए हैं।

कमोबेश इसी तरह की स्टडी जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग की भी है जिसमें साफ किया गया है कि मोबाइल गेम्स या मोबाइल नशे पर रोक-टोक से हर बार उत्तेजना बढ़ने से किशोरों और बच्चों के नजरिए में माता-पिता के प्रति बदलाव की भी रिपोर्ट सामने आ रही है। उर्सला और हैलट में हर हफ्ते 60 पैरेन्ट्स अपने बच्चों की मोबाइल गेम्स की शिकायत दूर करने के लिए पहुंच रहे हैं। इन्हीं में उर्सला और हैलट ने 100-100 बच्चों और किशोरों को स्टडी का हिस्सा बनाया है। राजकीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की यूनिट ने मनकक्ष तक खोल दिया है जिसमें डॉक्टर बकायदा उनकी काउंसिलिंग कर रहे हैं।

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मोबाइल गेम्स से कैसे बचें

बच्चों और पैरेन्ट्स मोबाइल को बंद रखकर बच्चे से संवाद करें। बच्चे की रूचि के हिसाब से उसे काम करने दें। मानसिक विकार को नजरअंदाज न करें, अपना व्यवहार को बदल लें।

बच्चे हो रहे आक्रामक

डॉ.गणेश शंकर, मनोरोग विभाग सहायक प्रोफेसर के अनुसार मोबाइल गेम्स का नशा तेजी से बढ़ रहा है। बच्चों को समय से पहले मोबाइल गेम्स खेलने से आक्रामक सोच, चिड़चिड़ापन और अनिद्रा की बीमारी हो रहे हैं। पैरेन्ट्स हर रोज आ रहे हैं और बच्चे को नशे से बाहन निकालने की गुहार लगा रहे हैं। मोबाइल गेम्स का नशा अब ग्रुप गतिविधि के रूप में फैल रहा है। यह नशा परिवार से आइसोलेट करने लगा है। अब आक्रामक जटिल विकार 30 फीसदी तक हो गया है।

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