
बारिश से बदलेगा मौसम का मिजाज; अगले दो दिनों में और आगे बढ़ने के संकेत (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)
IMD Predicts Widespread Rainfall in Next 48 Hours : देशभर में लंबे इंतजार के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के ताजा अपडेट के अनुसार 1 जुलाई 2026 को मानसून ने उत्तर भारत के कई नए क्षेत्रों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा दी है।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के लिए यह खबर विशेष रूप से राहत देने वाली है, क्योंकि मानसून अब इन दोनों राज्यों के अधिकांश हिस्सों को पूरी तरह से कवर कर चुका है। इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गुजरात, मध्य प्रदेश और हरियाणा-पंजाब के कुछ हिस्सों में भी मानसून की सक्रियता बढ़ गई है। लखनऊ मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो दिनों में मानसून के और आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल बनी हुई हैं।
उत्तर प्रदेश में इस बार मानसून ने जून के अंतिम सप्ताह से अपनी सक्रियता बढ़ानी शुरू कर दी थी, लेकिन 1 जुलाई को जारी ताजा अपडेट के बाद स्पष्ट हो गया है कि अब राज्य के अधिकांश हिस्से मानसून की चपेट में आ चुके हैं। पूर्वांचल, अवध, बुंदेलखंड और मध्य उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है।
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में प्रदेश के अधिकांश जिलों में हल्की से मध्यम तथा कहीं-कहीं भारी बारिश होने की संभावना है। इससे तापमान में गिरावट आएगी और पिछले कई दिनों से पड़ रही उमस तथा गर्मी से लोगों को राहत मिलेगी। किसानों के लिए भी यह बारिश बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि खरीफ फसलों की बुआई का यही सबसे उपयुक्त समय होता है।
उत्तराखंड में मानसून ने शेष सभी हिस्सों को भी कवर कर लिया है। पर्वतीय जिलों में लगातार हो रही बारिश से मौसम पूरी तरह बदल गया है। देहरादून, नैनीताल, टिहरी, पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और बागेश्वर सहित कई क्षेत्रों में बादलों की आवाजाही और रुक-रुक कर वर्षा का दौर जारी है।
हालांकि बारिश से गर्मी से राहत मिली है, लेकिन पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन, चट्टान गिरने और सड़क अवरुद्ध होने जैसी घटनाओं की आशंका भी बढ़ गई है। मौसम विभाग ने लोगों और यात्रियों को सतर्क रहने तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। चारधाम यात्रा मार्गों पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।
आईएमडी के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून ने उत्तर अरब सागर के कुछ और हिस्सों, पूरे दमन एवं दीव, गुजरात के अधिकांश भाग, मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों, उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से, उत्तराखंड के शेष क्षेत्रों, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख तथा पूरे जम्मू-कश्मीर में अपनी पहुंच बना ली है। इसके अलावा हरियाणा और पंजाब के कुछ हिस्सों में भी मानसून ने दस्तक दे दी है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून की वर्तमान गति सामान्य से बेहतर बनी हुई है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी मिलने के कारण उत्तर भारत में बारिश की गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। इसका सीधा असर कृषि, जल संसाधनों और पेयजल उपलब्धता पर सकारात्मक रूप से देखने को मिलेगा।
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने बताया कि 1 जुलाई 2026 तक मानसून की उत्तरी सीमा 22° उत्तर अक्षांश और 60° पूर्व देशांतर से शुरू होकर 22° उत्तर अक्षांश एवं 65° पूर्व देशांतर, पोरबंदर, वल्लभ विद्यानगर, शाजापुर, ललितपुर, नौगांव, मिर्जापुर, आजमगढ़, अयोध्या, बदायूं, मेरठ, करनाल, गुरदासपुर होते हुए 32.8° उत्तर अक्षांश और 73° पूर्व देशांतर तक पहुंच गई है।
यह दर्शाता है कि मानसून अब तेजी से उत्तर-पश्चिम भारत की ओर बढ़ रहा है। यदि वर्तमान परिस्थितियां बनी रहीं तो बहुत जल्द दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के शेष हिस्सों में भी मानसून पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा।
मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों में परिस्थितियां मानसून के और आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह अनुकूल बनी हुई हैं। इस दौरान उत्तर अरब सागर, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब और राजस्थान के कई नए हिस्सों में मानसून के पहुंचने की संभावना है। उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है, जबकि कुछ जिलों में भारी वर्षा की भी संभावना जताई गई है। वहीं उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मध्यम से भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। मौसम वैज्ञानिकों ने नदी-नालों के किनारे रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने और पहाड़ी क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।
मानसून की अच्छी शुरुआत किसानों के लिए किसी खुशखबरी से कम नहीं है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सहित उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में धान, मक्का, बाजरा, सोयाबीन और अन्य खरीफ फसलों की बुआई का कार्य तेज हो जाएगा। पर्याप्त वर्षा होने से सिंचाई पर निर्भरता कम होगी और भूजल स्तर में भी सुधार आने की संभावना है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जुलाई के पहले पखवाड़े में सामान्य या उससे अधिक वर्षा होती है तो इस वर्ष खरीफ उत्पादन बेहतर रहने की उम्मीद है। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ खाद्यान्न उत्पादन पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
लगातार बढ़ते तापमान और उमस से परेशान लोगों के लिए मानसून राहत लेकर आया है। बारिश के कारण तापमान में गिरावट दर्ज होगी और वातावरण सुहावना बनेगा। हालांकि तेज बारिश वाले क्षेत्रों में जलभराव, बिजली गिरने, तेज हवाओं और यातायात प्रभावित होने जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। मौसम विभाग का कहना है कि बारिश के दौरान खुले स्थानों, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों से दूरी बनाए रखें। पहाड़ी क्षेत्रोंमें यात्रा करने वाले लोग मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही सफर करें। प्रशासन द्वारा जारी चेतावनियों और सलाह का पालन करना सभी के लिए जरूरी होगा।
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Updated on:
02 Jul 2026 07:29 am
Published on:
02 Jul 2026 07:29 am
