3 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

कौन हैं स्वामी प्रसाद मौर्य? AJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष बोले- इंडिया अलायंस का हिस्सा होगी पार्टी, जानिए राजनीतिक सफर

Swami Prasad Maurya joins India Alliance: राहुल गांधी से मुलाकात के बाद अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने INDIA गठबंधन में शामिल होने की बात कही है। जानिए प्रतापगढ़ से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर, बसपा, बीजेपी और सपा से जुड़ा सफर और परिवार की सियासी पृष्ठभूमि।
3 min read
Google source verification

लखनऊ

•

image

Harshul Mehra

•

Oct 03, 2026

swami-prasad-maurya-political-journey-apni-janta-party-india-alliance

स्वामी प्रसाद मौर्य। फोटो-ANI

Swami Prasad Maurya joins India Alliance: उत्तर प्रदेशकी राजनीति से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। अपनी जनता पार्टी (AJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मंत्रीस्वामी प्रसाद मौर्यने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि उनकी पार्टी अब विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन का हिस्सा बनने जा रही है। राहुल गांधी से मुलाकात के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच विपक्षी एकजुटता को लेकर सकारात्मक बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जिस तरह देशभर में SC, ST, OBC और अल्पसंख्यक समुदायों की आवाज उठा रहे हैं, उसी तरह उनकी पार्टी भी उत्तर प्रदेश में सामाजिक न्याय के एजेंडे पर काम कर रही है। स्वामी प्रसाद मौर्य के मुताबिक, दोनों पक्षों की समान विचारधारा को देखते हुए अपनी जनता पार्टी INDIA गठबंधन का हिस्सा बनकर आगामी चुनावी मैदान में उतरेगी। आपको बताते हैं कौन हैं स्वामी प्रसाद मौर्य और उनके राजनीतिक सफर के बारे में।

कौन हैं स्वामी प्रसाद मौर्य? प्रतापगढ़ में हुआ जन्म, इलाहाबाद से पढ़ाई

स्वामी प्रसाद मौर्य का जन्म 2 जनवरी 1954 को प्रतापगढ़ जिले के चकवड़ गांव में हुआ था। उन्होंने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से लॉ में स्नातक और एमए की डिग्री हासिल की। उन्होंने 1980 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा। इसके बाद वह इलाहाबाद युवा लोकदल की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य बने और जून 1981 से 1989 तक महामंत्री पद पर रहे। उत्तर प्रदेश विधानसभा के रिकॉर्ड में भी उनके शुरुआती राजनीतिक सफर की शुरुआत 1980 में युवा लोकदल से होने का उल्लेख है।

रायबरेली के ऊंचाहार से मिली राजनीतिक पहचान

स्वामी प्रसाद मौर्य ने 80 के दशक में चुनावी राजनीति में कदम रखने के लिए डलमऊ विधानसभा सीट को चुना, जिसे अब ऊंचाहार सीट के तौर पर जाना जाता है। उनका बचपन गरीबी में बीता। ऊंचाहार में उन्हें उनके ही मौर्य समाज से आने वाले रामनाथ सेठ का सहयोग मिला। चुनाव लड़ने के दौरान रामनाथ सेठ ने उन्हें आर्थिक मदद देने के साथ-साथ मौर्य वोटों को जोड़ने के लिए भी काम किया। लोकदल से लेकर जनता दल तक उन्होंने कई बार चुनाव लड़ा, लेकिन शुरुआती दौर में उन्हें जीत नहीं मिली। 1991 से 1995 तक वह जनता दल में रहे। इसके बाद मायावती के पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने बसपा का दामन थाम लिया।

1996 में पहली बार विधायक बने

1996 में स्वामी प्रसाद मौर्य पहली बार डलमऊ सीट से विधायक बने। 2002 में उन्होंने इसी सीट से दोबारा जीत दर्ज की। इस दौरान वह मायावती सरकार में मंत्री भी बने। हालांकि, 2007 में बसपा की लहर के बावजूद उन्हें डलमऊ सीट पर हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद भी मायावती ने उन्हें अपनी कैबिनेट में मंत्री बनाया।

पडरौना को बनाया अपनी कर्मभूमि

2009 में स्वामी प्रसाद मौर्य ने कुशीनगर की पडरौना सीट से उपचुनाव जीता और विधानसभा पहुंचे। इसके बाद उन्होंने लगातार 3 बार इसी सीट से जीत दर्ज की। इसके बाद उन्होंने अपनी ऊंचाहार सीट अपने बेटे उत्कृष्ट मौर्य यानी अशोक मौर्य को सौंप दी।

बसपा छोड़कर बीजेपी और फिर सपा में गए

2016 में स्वामी प्रसाद मौर्य ने बसपा छोड़ दी। इसके बाद मुलायम सिंह यादव, शिवपाल यादव और आजम खान ने उन्हें सपा में आने का न्योता दिया था। हालांकि, उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया।

2017 से 2022 तक उत्तर प्रदेश में बीजेपी सरकार के दौरान स्वामी प्रसाद मौर्य योगी मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री रहे। इससे पहले वह बसपा में विधायक दल के नेता और नेता प्रतिपक्ष भी रह चुके थे।2022 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने बीजेपी छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया।

मुलायम परिवार से रहे राजनीतिक रिश्ते

स्वामी प्रसाद मौर्य के अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव के साथ राजनीतिक रिश्ते रहे हैं।

मौर्य समाज में राजनीतिक पकड़ का दावा

स्वामी प्रसाद मौर्य को पिछड़ा वर्ग के बड़े नेताओं में गिना जाता है। वह मौर्य समाज से आते हैं। बसपा में रहते हुए उन्होंने मौर्य समाज के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ बनाई। इसी वजह से पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल तक उनके प्रभाव की बात कही जाती रही है।

बेटी रह चुकी सांसद और बेटा भी राजनीति में

स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी संघमित्रा मौर्य बदायूं से बीजेपी सांसद रही हैं। उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा के धर्मेंद्र यादव को हराया था।

उनके बेटे उत्कृष्ट मौर्य रायबरेली की ऊंचाहार सीट से विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन उन्हें अभी तक जीत नहीं मिली है। उनकी बहू ऊंचाहार के गौरा ब्लॉक से ब्लॉक प्रमुख चुनी गई हैं। अब राहुल गांधी से मुलाकात के बाद अपनी जनता पार्टी के INDIA गठबंधन में शामिल होने की बात सामने आई है। ऐसे में स्वामी प्रसाद मौर्य के राजनीतिक सफर में एक और नया पड़ाव जुड़ता दिखाई दे रहा है।