उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि, जनता की परेशानियों के दृष्टिगत यह प्रस्ताव तैयार किया गया है और वर्तमान समय की ग्रामीण जनता की वास्तविक आवश्यकता भी है, क्योंकि पहले जिन घरों के सामने काफी जगह पड़ी रहती थी, वहां बारात के ठहरने व ग्रामीण संस्कृति से जुड़े विभिन्न परंपरागत कार्यक्रम आसानी से होते रहते थे, बढ़ती आबादी के चलते वहां पर आवासीय स्थल बन गए, परिणामस्वरूप गांवों में अब खुले स्थानों की अपेक्षाकृत कमी हुई है और आम लोगों विभिन्न आयोजनों के लिए कवर्ड एरिया भी बहुत ही कम है।