
नई दिल्ली: देश के हाई प्रोफाइल मर्डर केस आरुषि हेमराज मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से राजेश नूपुर तलवार को मिली क्लीनचिट के खिलाफ सीबीआई सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। गुरुवार को सीबीआई ने इलाहबाद हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। गौरतलब है कि 12 अक्टूबर को इलाहबाद हाई कोर्ट ने सीबीआई कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए तलवार दंपती को बरी कर दिया था। हालांकि तय समय के भीतर सीबीआई की तरफ से कोई अपील नहीं की गई थी। जिसके बाद सीबीआई पर सवाल खड़े होने लगे थे।न्यायमूर्ति बीके नारायण और न्यायमूर्ति एके मिश्र की पीठ ने आरुषि तलवार और घरेलू नौकर हेमराज की हत्या के मामले में गाजियाबाद की विशेष सीबीआई अदालत के निर्णय के खिलाफ तलवार दंपति की अपील स्वीकार करते हुए उन्हें इस मामले से बरी कर दिया था।
तलवार दंपती को आजीवन कारावास की सजा थी
गौरतलब है कि आरुषि हमेराज हत्याकांड में विशेष सीबीआई अदालत ने तलवार दंपती को 26 नवंबर, 2013 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। लेकिन ईलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि परिस्थितियों और रिकार्ड में दर्ज साक्ष्यों के मुताबिक तलवार दंपति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इस तरह से उसने तलवार दंपती की आजीवन कारावास की सजा को रद्द कर दिया।
क्या है मामला
16 मई 2008 को दिल्ली से सटे नोएडा के जलवायु विहार स्थित घर में 14 साल की आरुषि का शव मिला। जबकि 17 मई को नौकर हेमराज की डेड बाडी छत पर मिली थी। 2008 के आरुषि-हेमराज हत्याकांड में अदालत आरुषि के माता-पिता नूपुर और राजेश तलवार को दोषी करार दिया। उस वक्त की उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी।
मर्डर-मिस्ट्री में कब-कब क्या हुआ?
16 मई, 2008- नोएडा में 14 वर्ष की आरुषि तलवार की डेड बॉडी उसके बेडरूम से मिली। उसका गला कटा था। शक नौकर हेमराज पर गया।
17-मई, 2008- हेमराज का शव तलवार के घर की छत से मिला।
23-मई, 2008- आरुषि के पिता डॉ. राजेश तलवार को यूपी पुलिस ने आरुषि और हेमराज की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया।
1-जून, 2008- सीबीआई ने मामले की जांच अपने हाथ में ले ली थी।
13-जून, 2008- डॉ राजेश तलवार के कम्पाउंडर कृष्णा को सीबीआई ने गिरफ्तार किया। तलवार के दोस्त दुर्रानी के नौकर राजकुमार और तलवार के पड़ोसी के नौकर विजय मंडल को भी बाद में गिरफ्तार किया गया। तीनों आरुषि और हेमराज हत्याकांड के आरोपी बने।
12-जुलाई, 2008- राजेश तलवार गाजियाबाद की डासना जेल से जमानत पर रिहा हुए।
12-सितंबर, 2008- कृष्णा, राजकुमार और विजय मंडल को लोअर कोर्ट से जमानत मिली। सीबीआई 90 दिन तक चार्जशीट फाइल नहीं कर सकी।
10-सितंबर, 2009- आरुषि हत्याकांड की जांच के लिए सीबीआई की दूसरी टीम बनी।
29-दिसंबर, 2010- सीबीआई ने आरुषि हत्याकांड में अदालत में क्लोजर रिपोर्ट लगा दी।
25- जनवरी, 2011- राजेश तलवार ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ लोअर कोर्ट में प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल की।
9- फरवरी, 2011- लोअर कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट खारिज की, आरुषि के मां-बाप, राजेश और नुपुर तलवार को हत्या और सुबूत मिटाने का दोषी माना।
21- फरवरी, 2011- डॉ राजेश और नूपुर तलवार ट्राइल कोर्ट के समन को रद्द करवाने हाइकोर्ट गए।
18 मार्च, 2011- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने समन रद्द करने की तलवार की गुजारिश खारिज की और उन पर कार्यवाही शुरू करने आदेश दिए।
19- मार्च, 2011- तलवार सुप्रीम कोर्ट गए, जिसने उनके खिलाफ ट्राइल को स्टे कर दिया।
6- जनवरी, 2012- सुप्रीम कोर्ट ने तलवार की अर्जी खारिज की और ट्राइल शुरू करने की इजाजत दी।
11- जून, 2012 - गाजियाबाद में विशेष सीबीआई जज एस लाल के सामने ट्राइल शुरू हुआ।
10- अक्टूबर, 2013- फाइनल आर्गयुमेंट शुरू हुआ।
25 -नवंबर, 2013- तलवार दंपती को गाजियाबाद की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने दोषी पाया और उम्र कैद की सजा सुनाई।
जनवरी, 2014 : तलवार दंपती ने लोअर कोर्ट के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी।
11- जनवरी, 2017- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलवार की अपील पर फैसला सुरक्षित किया।
01-अगस्त, 2017- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि तलवार की अपील दोबारा सुनेंगे, क्योंकि सीबीआई के दावों में विरोधाभास है।
08-सितंबर, 2017 - इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरुषि हत्याकांड में फैसला सुरक्षित किया।
12- अक्टूबर, 2017- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए तलवार दंपती को बरी किया।
16 अक्टूबर, 2017- गाजियाबाद के डासना जेल से दोनों रिहा हुए।
Updated on:
08 Mar 2018 10:50 pm
Published on:
08 Mar 2018 09:54 pm
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