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मोदी सरकार को झटकाः कैग का दावा, ’19 मंत्रालयों-विभागों ने देश को लगाई 1179 करोड़ की चपत’

वित्तीय अनियमितताओं हुई जिन्होंने सरकारी राजस्व को 1179 करोड़ रुपए की चपत लगाई गई है। 4 अप्रैल 2018 को संसद पहुंची इस रिपोर्ट के मुताबिक अनियमितताएं मार्च 2017 तक के वित्तीय दस्तावेजों की छानबीन के बाद पकड़ में आईं।
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नई दिल्ली

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Pritesh Gupta

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Updated: 17 Jul 2018, 7:21 PM IST

PM Modi

मोदी सरकार को झटकाः कैग का दावा, '19 मंत्रालयों-विभागों ने देश को लगाई 1179 करोड़ की चपत'

नई दिल्ली। मिशन-2019 के लिए ताबड़तोड़ तैयारियों में जुटी भाजपा के सामने एक बड़ी चुनौती आ गई है। दरअसल नियंत्रण एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की एक रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। इसके मुताबिक देश के 19 मंत्रालयों और उनके अधीन चल रहे संस्थानों में एक साल के दौरान नियमों की अनदेखी की गई। इससे वित्तीय अनियमितताओं हुई जिन्होंने सरकारी राजस्व को 1179 करोड़ रुपए की चपत लगाई गई है। 4 अप्रैल 2018 को संसद पहुंची इस रिपोर्ट के मुताबिक अनियमितताएं मार्च 2017 तक के वित्तीय दस्तावेजों की छानबीन के बाद पकड़ में आईं। कैग के मुताबिक सालभर में मंत्रालयों के खर्च में 38 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया है। जनता पर दिनों दिन बढ़ रहे बोझ के बीच मोदी सरकार के लिए इसका जवाब देना मुश्किल होगा।

...इन मंत्रालयों में हुईं गड़बड़ियां

- मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय
- विदेश मंत्रालय
- सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय
- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण
-संस्कृति मंत्रालय
- उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय
- वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
- कृषि मंत्रालय
- गृह मंत्रालय

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...ये विभाग भी शामिल

- नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रीशियन (आईसीएमआर), हैदराबाद (अनुपयोगी उपकरण खरीद)
- दिल्ली पुलिस (अनुपयोगी सर्वर और सॉफ्टवेयर की खरीद)
- आईआईटी मुंबई (सर्विस टैक्स का अनियमित भुगतान)

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...इस तरह की अनिमयमितताएं मिलीं

- परियोजनाओं और बजट प्रबंधन में लापरवाही
- अनियंत्रित बजट खर्च
- स्टाफ को अनियमित भुगतान
- विदेश मंत्रालय में अनियमित वीजा फीस वसूली के चलते 76 करोड़ की चपत
- मानव संसाधन, सूचना-प्रसारण और जहाजरानी मंत्रालय में 89.56 करोड़ रुपए की बकाया वसूली नहीं हुई।
- वित्तीय प्रबंधन की अनदेखी से वाणिज्य और संस्कृति समेत तीन मंत्रालयों में 19.33 करोड़ का नुकसान हुआ।
- वाणिज्य मंत्रालय के अधीन आने वाले एक्सपोर्ट इंस्पेक्शन काउंसिल ऑफ इंडिया में पैसों को फिक्स्ड डिपॉजिट के बजाए बचत खाते में रखा गया था। इससे सरकार को तीन साल में ब्याज के रूप में 13.76 करोड़ का नुकसान हुआ।

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