30 अक्टूबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

लोकसभा चुनाव 2019 से पहले हो सकता है राम मंदिर निर्माण का फैसला!

बीते कुछ वक्त की हलचलों को देखने के बाद ऐसा लगता है कि 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले राम मंदिर के निर्माण का फैसला हो सकता है। आइए जानते हैं कि इसकी प्रमुख वजहें क्या हैं।
6 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

नई दिल्ली

•

image

Amit Kumar Bajpai

•

Updated: 4 Oct 2018, 3:42 PM IST

Ram Temple Decision

आम चुनाव 2019 से पहले हो सकता है राम मंदिर का निर्माण

नई दिल्ली। अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कब होगा, इसका जवाब पूरा देश जानना चाहता है। यह मामला भले सुप्रीम कोर्ट में चल रहा हो लेकिन कुछ समय से इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी अचानक बढ़ गई है। देश के इस सबसे चर्चित और पुराने मुकदमे पर फैसला देना कोर्ट के लिए भले बड़ी चुनौती हो लेकिन भाजपा और संघ से जुड़े नेताओं का दावा है कि 2019 के आम चुनाव से पहले राम मंदिर पर फैसला हो जाएगा। दरअसल, 29 अक्टूबर से सुप्रीम कोर्ट इस मामले की रोज सुनवाई करने जा रहा है। माना जा रहा है कि अगर सुनवाई लगातार चली तो फैसला जल्दी आ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट और जस्टिस गोगोई

करीब तीन दशक पहले अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को राम मंदिर आंदोलन में विवादित ढांचा ढहा दिया गया था। इसके बाद कई मुकदमे चले। मालिकाना हक पर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट को फैसला सुनाना बाकी है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 30 सितंबर 2010 को दिए फैसले में कहा था कि तीन गुंबदों में जहां फिलहाल रामलला की मूर्ति है वो हिस्सा हिंदुओं का होगा। वहीं, दूसरा हिस्सा निर्मोही अखाड़े को दिया गया, जिसमें सीता रसोई और राम चबूतरा शामिल है। जबकि एक तिहाई हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया गया। हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, इस पर 9 मई 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाते हुए तत्कालीन स्थिति को बहाल कर दिया था।

भारत के मंदिरः अभी भी कहीं पर पुरुषों तो कहीं पर महिलाओं के प्रवेश पर है पाबंदी

फिर मालिकाना हक के विवाद को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई शुरू हुई और तमाम कागजात के अनुवाद हुए। हालांकि सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्षकारों की ओर से केस लड़ रहे वकील कपिल सिब्बल की इस दलील ने विवाद खड़ा कर दिया कि सुनवाई की जल्दी क्यों है? उन्होंने इस मामले की सुनवाई 2019 के चुनाव के बाद किए जाने की भी बात कही। इसके पीछे उनकी मंशा 2019 के आम चुनाव संपन्न होने के बाद मामले की सुनवाई का था। सिब्बल ने कहा था कि यह साधारण जमीन विवाद नहीं है।

हिंदू पक्षकारों ने कहा था सुनवाई टली तो गलत संदेश

इस मामले में हिंदू पक्षकारों की ओर से पेश वकील हरीश साल्वे का कहना था कि यह मामला सात वर्षों से अदालत में लंबित है। अदालत को बाहर क्या हो रहा है इससे मतलब नहीं होता, इसलिए जुलाई 2019 तक सुनवाई टाल देने से गलत संदेश जाएगा। कुछ दिन पहले रिटायरमेंट से पहले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने राम मंदिर से जुड़े मामले की सुनवाई आगामी 29 अक्टूबर से चालू करने का आदेश दे दिया था। जस्टिस रंजन गोगोई नवंबर 2019 तक प्रधान न्यायाधीश रहेंगे। मामले की सुनवाई इनके कार्यकाल में होनी है। अदालत कह चुकी है कि वो इस मामले को जमीन के मालिकाना हक के विवाद के रूप में देखती है। इसका चुनाव में इससे क्या फर्क पड़ता है यह उसकी जिम्मेदारी नहीं है।

मस्जिद और इस्लामः इस मामले को बड़ी बेंच के पास भेजना चाहते थे जस्टिस नजीर

संघ प्रमुख ने छेड़ा मंदिर का जिक्र

सोमवार को हरिद्वार में बाबा रामदेव के पतंजलि योगपीठ पहुंचे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने एक बार फिर से राम मंदिर मुद्दे को चुनावी मैदान में ला खड़ा किया। उन्होंने हिंदू संत समाज से अपील की कि वे इस मुद्दे को उठाएं। उन्होंने कहा, संत समाज पर सरकार की बंदिश नहीं है। उन्हें चाहिए कि राम मंदिर मुद्दे को आगे बढ़ाएं। बताया जा रहा है कि शुक्रवार 5 अक्टूबर को राम मंदिर के मुद्दे पर दिल्ली में संतों-धर्माचार्यों की एक कमेटी की बैठक होने वाली है। इस दौरान विभिन्न मठों-पंथों के धर्म गुरुओं को इस मुहिम की अगुवाई दी जा सकती है। वहीं, भागवत ने यह भी कहा कि राम मंदिर का निर्माण रोकने का दम विपक्ष में भी किसी के पास नहीं है।

स्वामी ने कहा हिंदुओं के पक्ष में होना चाहिए फैसला

अपने बयानों को लेकर चर्चित रहने वाले भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी भी राम मंदिर निर्माण को लेकर कई बार अपना पक्ष रख चुके हैं। अब उन्होंने भागवत के बयान का समर्थन करते हुए कहा, बिल्कुल सही, यह उनकी राय है और देश के ज्यादातर हिंदू भी यही चाहते हैं। कांग्रेस और उनके नेताओं ने यह सवाल खड़ा करते हुए इस मामले की कार्रवाई आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की कि पहले इसके फैसले की समीक्षा पांच जजों से करवाते हैं, फिर 7 और फिर 9 जजों से। किस्मत से सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट आदेश दे चुका है कि मस्जिद इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है। जबकि राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा और पूजा का अंग है। इसलिए राम ही मंदिर के मालिक हैं। निर्मोही अखाड़ा और राम जन्म भूमि न्यास केवल मंदिर के ट्रस्टी हैं और भगवान ही इसका मालिक है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर की गई जांच में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग यह पहले ही घोषित कर चुका है कि बाबरी मस्जिद का निर्माण राम मंदिर को गिराकर किया गया था।

गफलत में न रहें: मस्जिद में नमाज पढ़ना और अयोध्या विवाद दोनों हैं अलग मामले

उन्होंने आगे कहा कि इस संबंध में नरसिम्हा राव सरकार का एक एफिडेविट भी है जिसमें दावा किया गया था कि अगर यह साबित हो जाता है कि यहां पर पहले से एक मंदिर था, तो वो जमीन हिंदुओं को सौंप दी जाएगी। मुझे लगता है कि मुस्लिम समुदाय को वक्फ बोर्ड पर दबाव बनाना चाहिए कि कहीं और जमीन देखें और मस्जिद बनाएं क्योंकि आप कहीं पर भी मस्जिद बना सकते हैं। इसे राम के पक्ष में ही जाना चाहिए और फिर ऐसा ही कृष्णा मथुरा और काशी विश्वनाथ के साथ होना चाहिए।

अयोध्या में महंत का आमरण अनशन

रामघाट स्थित तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए आमरण अनशन शुरू कर दिया है। पेड़ की छांव में छावनी के गेट पर बैठे महंत ने कहा कि जब तक सरकार राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त नहीं कर देगी, उनका आमरण अनशन जारी रहेगा। महंत के अनशन को प्रवीण भाई तोगड़िया का समर्थन मिला है। महंत के समर्थन में वह 8 अक्टूबर को समर्थकों संग अयोध्या पहुंचेंगे। महंत परमहंस दास ने कहा कि अब राम मंदिर निर्माण में देरी नहीं होनी चाहिए।

हिंदुस्तान की सबसे मशहूर शख्सियत भगवान राम की भक्त

किसी भी तरह से निर्माण कार्य शुरू हो नहीं हुआ तो मैं यूं ही अपने प्राण त्याग दूंगा। मैं जिस त्याग पीठ का आचार्य हूं, देशभर में पीठ की 12 लाख स्थान शाखाएं हैं। यदि सरकार हमारी मांग स्वीकार नहीं करती है तो आने वाले दिनों में देश में यह बड़े आंदोलन का रूप धारण कर लेगा। मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए महंत ने कहा कि भाजपा ने अपने एजेंडे में राम मंदिर निर्माण रखा था, जिसके कारण आज वह देश की सत्ता पर काबिज हैं। लेकिन आज तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार भी अयोध्या नहीं आए।

अयोध्या में सरकार की दीपावली

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीते साल अयोध्या में सरयू नदी के किनारे भव्य दीपावली का आयोजन किया था। छोटी दिवाली पर राम की पैड़ी में आयोजित दीपोत्सव कार्यक्रम में यूपी सरकार द्वारा 1 लाख 87 हजार 213 से ज्यादा दीये रोशन किए गए। बताया जा रहा है कि इस साल दीपोत्सव को और भव्य बनाया जाएगा और 5 लाख दीये रौशन होंगे। हिंदुत्व की राजनीति करने वाले सीएम योगी आदित्यनाथ का भी मन है कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो और वो इसके लिए प्रयास भी कर रहे हैं।

शिवसेना का वार

राम मंदिर मुद्दे पर अब ताजा बयान शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत का आया है। राउत ने कहा कि जन्मभूमि निर्माण के मुख्य महंत व्यास जी ने उद्धव ठाकरे से मुलाकात की और कहा कि सिर्फ शिवसेना ही मंदिर का निर्माण करा सकती है। देश और दुनिया ने शिवसेना के समर्पण को देखा है। हम लोग अयोध्या पहुंचने के बारे में भी सोच रहे हैं। अगर राम मंदिर का निर्माण अभी नहीं हुआ तो वो कभी नहीं बनेगा।