
नई दिल्ली। सीरिया में केमिकल हमले के बाद वहां की सरकार के खिलाफ जंग छेड़ चुके अमरीका, फ्रांस और ब्रिटेन ने शुक्रवार को कई मिसाइलें दागी। मिसाइलों के इन ताबड़तोड़ हमलों को फ्रांस ने सीरिया के लिए घातक बताया है। फ्रांस के विदेश मंत्री जेन-यवेस ले ड्रेन ने जानकारी देते हुए कहा कि इससे वहां की सरकार को भारी नुकसान हुआ है। ड्रेन ने यह भी दावा किया इन हमलों से वहां मौजूद रासायनिक हथियारों के बड़े जखीरे एक बार में ही तबाह हो गए हैं।
जारी रहेंगी हमले
फ्रांस ने विदेश मंत्री ने सीरिया को धमकी देते हुए कहा कि रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल को लेकर कुछ सीमाएं और कानून बनाए गए थे। ऐसे में इन नियमों के उल्लघंन होने पर ऐसी कार्रवाई जारी रहेंगी। बता दें कि फ्रांस ने डूमा में हुए केमिकल हमले के पर्याप्त सूबतों का होना बताया था। दरअसल, अमरीका, ब्रिटेन और फ्रांस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए सीरिया के कई अहम सैन्य ठिकानों पर हमले किए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीरियाई सरकार द्वारा डौमा में कथित तौर पर किए गए रासायनिक हमले पर प्रतिक्रियास्वरूप यह कदम उठाया है। ट्रंप ने व्हाइट हाउस से कहा कि मैंने अमरीकी सशस्त्रबलों को सीरिया के तानाशाह बशर अल असद सरकार के डौमा में रासायनिक हमलों पर प्रतिक्रियास्वरूप उनके चुनिंदा सैन्य ठिकानों पर हमला करने के आदेश दिए हैं।
हथियारों के जखीरों को निशाना बनाकर किया हमला
पेंटागन के मुताबिक, ये हवाई हमले सीरिया के रासायनिक हथियारों के तीन भंडारगृहों को निशाना बनाकर किए गए। इसमें दमिश्क के पास वैज्ञानिक शोध अनुसंधान इकाई शामिल है, जहां रासायनिक हथियारों का कथित तौर पर उत्पादन होता है। होम्स के पास रासायनिक हथियार भंडारण इकाई और होम्स शहर के अहम सैन्य ठिकाने, जहां रासायनिक हथियारों से जुड़ी सामग्री रखी जाती है। सीरियन ऑब्जर्वेटरी के मुताबिक, जिन-जिन स्थानों को निशाना बनाकर हमले किए गए, उनमें सीरियाई सेना की 4वीं टुकड़ी और रिपब्लिकन गार्ड भी शामिल हैं।
Updated on:
14 Apr 2018, 7:47 PM IST
Published on:
14 Apr 2018, 7:00 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.