
नई दिल्ली। नोबल पुरस्कार की घोषणा पर इस साल संकट के बादल मंडरा रहे हैं। दरअसल विश्व की सबसे श्रेष्ठ सम्मान नोबल पुरस्कार की एक इकाई पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। साहित्य में नोबल पुरस्कार देने वाली संस्था एक सेक्स स्कैंडल में फंस गई है। इस घटना के बाद से 2018 के साहित्य नोबल प्रदान करने पर संकट के बादल घिर गए हैं। इससे पहले 1943 में साहित्य में नोबेल पुरस्कार द्वितीय विश्व युद्ध को लेकर स्थगित कर दिया गया था।
मीडिया रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि फ्रेंच फोटोग्राफर जीन क्लाउड अरनॉल्ट के कथित यौन दुराचार को लेकर स्वीडिश एकेडमी आलोचनाओं के घेरे में है। अरनॉल्ट की शादी सदियों पुरानी एकेडमी के एक पूर्व सदस्य के साथ हुई है। आपको बता दें कि साहित्य का नोबल स्वीडिश एकेडमि विश्व के प्रसिद्ध लेखकों और साहित्यकारों को हर वर्ष प्रदान करती है। अब एकेडमि को यह फैसला करना है कि क्या इस वर्ष यह पुरस्कार दिया जाएगा या नहीं। सबसे बड़ी बात यह है कि एकेडमि के कुछ सदस्य यह पुरस्कार प्रदान करने को लेकर चिंतित हैं और वे इसके लिए स्थिति को अनुकूल नहीं बता रहे हैं।
क्या है मामला
गौरतलब है कि पिछले वर्ष नवंबर में 18 महिलाओं ने 'हैश मी टू' आन्दोलन चलाया था। इन सभी महिलाओं ने अरनॉल्ट पर यौन शोषण करने का आरोप लगाया था। हालांकि अरनॉल्ट ने इन सबी आरोपों से इनकार किया है। बता दें कि एकेडमी की परिसंपत्ति को लेकर भी अरनॉल्ट पर कथित तौर पर कई आरोप लगाए गए हैं।
संस्था ने अरनॉल्ट को किया बाहर
आपको बता दें कि आरोप लगने के बाद संस्था ने अरनॉल्ट को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। साथ ही संगठन ने उनकी पत्नी और कवयित्री व लेखिका कटरीना फ्रोस्टेनसन को 18 सदस्यीय कमेटी से निकालने को लेकर वोट किया। एकेडमी की स्थाई सदस्य सारा डेनिअस ने कहा कि संस्थान ने कथित आरोपों के बाद अरनॉल्ट से पूरी तरह संबंध तोड़ लिया है। उनपर एकेडमी के कर्मचारी व सदस्यों के रिश्तेदारों के साथ अवांछित यौन संबंध बनाने के आरोप हैं। बता दें कि अबतक एकेडमी के छह सदस्यों ने अपना इस्तीफा दे दिया है।
Published on:
4 May 2018, 5:45 PM IST
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