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सऊदी अरब में महिला अधिकारों के ​लिए आवाज उठाने वाले आखिर क्यों हो रहे प्रताड़ित

गिरफ्तार महिलाओं में लुजैन अल-हथलाउल और उमान अल-नफ़्जान शामिल हैं।इन्होंने महिलाओं के ड्राइविंग पर प्रतिबंध का लगातार विरोध किया था।
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नई दिल्ली

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Mohit Saxena

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Updated: 20 May 2018, 10:20 AM IST

saudi arab

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रियाद। सऊदी अरब में महिलाओं के ड्राइविंग से प्रतिबंध हटाए जाने के बाद से महिला अधिकारों के लिए लड़ने वाले कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई तेज हो गई है। इनकी गिरफ्तारियां की जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि महिला अधिकारों के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं को चुप कराने के लिए यह सब किया गया है। हालांकि सऊदी अरब के सरकारी समाचार चैनल का दावा है कि उन्हें इसलिए गिरफ्तार किया गया है क्योंकि वे विदेशी ताकतों से संपर्क में थे। मगर सूत्रों की माने तो जिस देश में महिलाओं के लिए सख़्त कानून बने हुए हैं,वहां महिलाओं को इस तरह की छूट देना सऊदी अरब के प्रशासन को रास नहीं आ रहा है।

दो महिलाओं को किया गया गिरफ़्तार

गिरफ्तार महिलाओं में लुजैन अल-हथलाउल और उमान अल-नफ़्जान शामिल हैं। इन महिलाओं ने ड्राइविंग पर प्रतिबंध का लगातार विरोध किया था। ये प्रतिबंध 24 जून से ख़त्म होने जा रहा है। ह्युमन राइट वॉच संगठन के अनुसार, हथलाउल और नफ़्जान ने 2016 में पुरुष अभिभावक प्रणाली (मेल गार्डियनशिप सिस्टम) को ख़त्म करने वाली याचिका पर हस्ताक्षर किए थे। इस प्रणाली के तहत महिलाओं की विदेश यात्रा और पुरुष अभिवावक की स्वीकृति के बिना शादी करने या पासपोर्ट बनवाने पर रोक थी। हथलाउल को पहले भी दो बार गिरफ़्तार किया जा चुका है। पहली बार उन्हें 2014 में तब गिरफ़्तार किया गया जब वह संयुक्त अरब अमीरात से सीमा पार करने की कोशिश कर रही थीं। सज़ा के तौर पर उन्हें 73 दिनों के किशोर हिरासत में भेजा गया था। दूसरी बार जून 2017 में उन्हें दम्माम एयरपोर्ट पर उतरते ही गिरफ़्तार कर लिया गया था लेकिन कुछ दिनों बाद उन्हें छोड़ दिया गया।

गिरफ्तारी का कोई कारण नहीं बताया

मानवाधिकार संगठन का कहना है कि उन्हें 15 मई को ही पकड़ लिया गया था लेकिन अधिकारियों ने गिरफ़्तार करने का कोई कारण नहीं बताया है। मानवाधिकार समूह का कहना है कि कार्यकर्ताओं को पिछले साल सितंबर में शाही अदालत से फोन आया था, जिसमें उन्हें चेतावनी दी गई थी कि वे मीडिया से बात न करें। बयान में कहा गया था कि यह फ़ोन उसी दिन आया था जिस दिन महिलाओं के ड्राइविंग से प्रतिबंध हटाने की घोषणा की गई थी।