
दोनों पैरों से दिव्यांग किसान ने सुनाई पीड़ा....
बाबूजी! मैं दोनों पैर से दिव्यांग हूं, 20 किमी दूर से ठंड में दूसरे के साथ बाइक से आया, लेकिन फिर भी टोकन नहीं मिला, अब दूसरे दिन फिर आना, ऐसी स्थिति में गेहूं की बोवनी कैसे हो पाएगी, यह कहना था दिव्यांग किसान कल्लू सिंह निवासी करारी गांव का। वह परिवार के एक लड़के के साथ बाइक से आया था, लेकिन उसको केन्द्र पर आते-आते आठ बज गए, तब तक टोकन बंट चुके थे। यह कहानी कल्लू सिंह की नहीं बल्कि ऐसे दर्जनों किसानों की है, जो बिना टोकन लिए लौट गए।
कृषि उपज मंडी परिसर में डीएमओ गोदाम पर खड़े किसानों ने कहा कि पहले सरसों के लिए खाद लेने चक्कर लगाए, अब गेहूं की बोनी का समय आ गया तो फिर वही हालात हैं। न तो समय पर खाद ही मिल पा रही है और न दूसरे काम हो पा रहे हैं। समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों ने राजस्व अमले के साथ सोमवार सुबह 778 टोकन बांट दिए। उसके बाद भी कई किसान टोकन से वंचित हो गए।
हुआ यूं कि जो किसान साढ़े सात बजे से पहले आ गए, उनको टोकन मिल गए, बाद में आने वाले किसानों को लौटना पड़ा। यहां बता दें कि दीपावली त्योहार के चलते लंबी छुट्टियों के बाद सोमवार सुबह बड़ी संख्या में किसान पहुंचे।
वहीं दीपावली से पहले जिन्हें टोकन वितरित किए गए, उनको खाद वितरित की गई। सबसे बड़ी परेशानी ये है कि किसान सुबह सात बजे से काउंटर पर लाइन में बैठ जाता है लेकिन, काउंटर साढ़े दस से पहले नहीं खुलता इसलिए किसानों को और परेशान होना पड़ता है।
Updated on:
05 Nov 2024 11:13 am
Published on:
05 Nov 2024 11:12 am
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