
कोली समुदाय की महिलाओं का BEST बसों में भेदभाव का आरोप , फोटो सोर्स-AI
BEST Bus Controversy: मुंबई की मछुआरा महिलाएं भोर में उठकर मछली खरीदने, बेचने और उसे बाजारों तक पहुंचाने का काम करती हैं। उनकी मेहनत से शहर के हजारों लोगों तक मछली पहुंचती है, लेकिन अब इन्हीं महिलाओं को सार्वजनिक परिवहन में भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि मछली की गंध का हवाला देकर BEST बसों के कंडक्टर उन्हें बस में चढ़ने से रोक देते हैं। इससे न केवल उनकी रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है, बल्कि रोजमर्रा के सफर में भी मुश्किलें बढ़ गई हैं।
The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई की कोली समुदाय की महिलाओं ने आरोप लगाया है कि मछली लेकर यात्रा करने के कारण उन्हें BEST बसों में प्रवेश नहीं दिया जाता। महिलाओं का कहना है कि कई बार मछली के अलावा दूसरी चीजें लेकर यात्रा करने पर भी उन्हें परेशानी झेलनी पड़ती है। यह मामला ऐसे शहर में विडंबना पैदा करता है, जहां मछली लोगों के खानपान और मछली कारोबार से जुड़े परिवारों की आजीविका का अहम हिस्सा है।
रिपोर्ट के अनुसार, मछली बेचने वाली महिलाओं का कहना है कि कुछ बस कंडक्टर दरवाजे पर ही उन्हें रोक देते हैं। कथित तौर पर इसकी वजह दूसरे यात्रियों को होने वाली परेशानी और मछली की गंध बताई जाती है। महिलाओं का सवाल है कि जब वे शहर के बाजारों तक मछली पहुंचाने का काम करती हैं, तो उन्हें सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने से क्यों रोका जाए? उनके मुताबिक, बस से यात्रा करना उनके लिए सुविधाजनक ही नहीं, बल्कि कामकाज का खर्च कम रखने के लिहाज से भी जरूरी है।
कोली समुदाय को मुंबई के शुरुआती निवासियों में गिना जाता है। पारंपरिक रूप से इस समुदाय के पुरुष समुद्र में मछली पकड़ने जाते थे, जबकि महिलाएं बाजारों में मछली बेचने की जिम्मेदारी संभालती थीं। हालांकि, समुद्र तटीय इलाकों में जमीन भरने, निर्माण कार्यों और बुनियादी ढांचे के विकास ने शहर की खाड़ियों में मछली पकड़ने की गतिविधियों को प्रभावित किया है। इसके चलते कई महिलाएं अब ससून डॉक जैसे प्रमुख मछली बाजारों में ट्रॉलर से आने वाली मछली खरीदती हैं और फिर उसे अलग-अलग इलाकों में बेचती हैं। रिपोर्ट में ससून डॉक में रोजाना लगभग 150 टन मछली और समुद्री खाद्य पदार्थों के कारोबार का जिक्र किया गया है। इनमें से करीब 80 फीसदी मछली मुंबई महानगर क्षेत्र के विभिन्न बाजारों में बेची और पहुंचाई जाती है।
70 वर्षीय सीता कमलचा ने BEST बसों से जुड़े अपने पुराने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि दशकों पहले वह अपनी मां के साथ परेल के भोईवाड़ा मछली बाजार से खार डांडा तक बस में सफर करती थीं। उस समय करीब एक घंटे की यात्रा का किराया चार आने यानी 25 पैसे हुआ करता था। आज इसी तरह के सफर के लिए किराया करीब 30 रुपये तक पहुंच गया है। लेकिन महिलाओं की परेशानी सिर्फ बढ़ते किराये तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि अब बस में प्रवेश मिलेगा या नहीं, इसे लेकर भी अनिश्चितता बनी रहती है।
BEST प्रशासन ने इन आरोपों के बीच स्पष्ट किया है कि नियमों के तहत मछली कारोबार से जुड़े लोगों को बस में यात्रा करने की अनुमति है, बशर्ते वे मछली को उचित कंटेनर में रखें। BEST के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, यदि बड़ी टोकरियों से पानी टपकता है या उनसे दूसरे यात्रियों को असुविधा होती है, तो ऐसे मामलों में प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। यानी प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई किसी व्यक्ति के पेशे के आधार पर नहीं, बल्कि यात्रा के दौरान पैदा होने वाली परेशानी को देखते हुए की जा सकती है। हालांकि, मछुआरा महिलाओं का दावा है कि कई बार उन्हें तब भी बस से उतार दिया जाता है, जब उनके पास मछली नहीं होती।
60 वर्षीय लता कुंडे ने आरोप लगाया कि करीब दो महीने पहले घर लौटते समय उन्हें ए-200 बस से उतरने के लिए मजबूर किया गया। उनके मुताबिक, कर्मचारियों ने उनकी टोकरी का सामान जांचे बिना ही उसे बाहर फेंक दिया। उस टोकरी में मछली के बजाय कांच की चूड़ियां, बटुआ और अन्य निजी सामान था। यह शिकायत इस सवाल को भी सामने लाती है कि बसों में सफाई और यात्रियों की सुविधा बनाए रखने के नियम लागू करते समय क्या सभी यात्रियों के साथ समान व्यवहार किया जा रहा है।
BEST प्रशासन के अनुसार, यात्रियों की शिकायतों के लिए 24 घंटे की हेल्पलाइन उपलब्ध है। बस टर्मिनलों पर शिकायत पेटियां भी रखी गई हैं, जहां यात्री कर्मचारियों के अनुचित व्यवहार की शिकायत कर सकते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, पहली शिकायत पर संबंधित कर्मचारी को चेतावनी दी जा सकती है। दोबारा गलती पाए जाने पर मामले की गंभीरता के अनुसार एक से दो दिन तक निलंबन जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।
BEST समिति की अध्यक्ष तृष्णा विश्वासराव ने कहा कि हर व्यक्ति को अपने पेशे या आय की परवाह किए बिना सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने का अधिकार है। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि इस तरह की घटनाएं हो रही हैं, तो मामले को देखा जाएगा।
Updated on:
23 Oct 2026, 2:13 PM IST
Published on:
23 Oct 2026, 2:13 PM IST
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