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पति ने कैप्सूल में डालकर खिलाए ब्लेड के टुकड़े, पत्नी ने फिर भी पक्ष में दी गवाही; पुणे कोर्ट ने सुनाई 7 साल की सजा

Pune News: पुणे में पत्नी को कैल्शियम की गोली बताकर कैप्सूल में ब्लेड के टुकड़े खिलाने के मामले में अदालत ने पति को सात साल की जेल और 70 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। पत्नी और बेटे के बयान बदलने के बावजूद अदालत ने यह फैसला सुनाया।
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मुंबई

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Dinesh Dubey

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Updated: 25 Oct 2026, 10:17 AM IST

Pune Domestic Violence

प्रतीकात्मक तस्वीर (AI Image)

MaharashtraCrime News: महाराष्ट्र के पुणे में पत्नी के चरित्र पर शक करने वाले एक व्यक्ति को अदालत ने सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी ने कथित तौर पर कैल्शियम की गोली के कैप्सूल में ब्लेड के छोटे-छोटे टुकड़े भरकर पत्नी को खिलाए थे। इससे महिला के पेट और आंतों में गंभीर परेशानी हुई। इस मामले में सुनवाई के दौरान पत्नी और बेटे ने अपने बयान बदल दिए और आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों से इनकार किया। हालांकि, मेडिकल रिपोर्ट, दवा की दुकान से हुई खरीदारी और पुलिस की जांच से जुड़े सबूतों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया।

दोषी का नाम सोमनाथ साधु सपकाल (45) है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनिरुद्ध गांधी ने मामले की सुनवाई के बाद उसे सात साल के सश्रम कारावास और 70 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

पत्नी के पेट से निकला ब्लेड का टुकड़ा, अस्पताल में हुआ खुलासा

यह मामला पुणे के उत्तमनगर पुलिस थाने में नवंबर 2023 में दर्ज किया गया था। पत्नी की शिकायत के अनुसार, आरोपी पति उसके चरित्र पर शक करता था और अक्सर उसे परेशान करता था। घटना से करीब दो महीने पहले उसका व्यवहार अचानक बदल गया था और वह पत्नी के साथ प्यार से पेश आने लगा था।

पत्नी के पैरों में दर्द होने की बात कहकर आरोपी उसे कैल्शियम की गोलियां देने लगा। हालांकि, पुलिस जांच में कथित तौर पर सामने आया कि वह कैप्सूल के अंदर का पाउडर निकालकर उसमें ब्लेड के बारीक टुकड़े भर देता था और फिर उसे कैल्शियम की गोली बताकर पत्नी को खिला देता था।

कुछ महीनों से महिला को पेट में तेज दर्द हो रहा था। अक्टूबर 2023 में शौच के दौरान ब्लेड का एक टुकड़ा बाहर निकला। महिला ने इसकी जानकारी पति को दी, लेकिन उसने कथित तौर पर टुकड़े को कचरे में फेंक दिया।

इसके बाद 4 नवंबर 2023 को फिर शौच के दौरान ब्लेड का एक टुकड़ा निकला। तब महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया। सीटी स्कैन में उसकी आंत में ब्लेड का टुकड़ा फंसा होने की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने एंडोस्कोपी के जरिए उसे बाहर निकाला। इसके बाद महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

घर से मिले थे ब्लेड के टुकड़े और दवाइयों का पैकेट

शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया और जांच पूरी करने के बाद अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया।

सुनवाई के दौरान कुल सात गवाहों के बयान दर्ज किए गए। दवा विक्रेता ने अदालत में गवाही दी कि आरोपी ने दवाइयों का पैकेट खरीदा था। पुलिस ने आरोपी के घर में रखे दिवान से ब्लेड के बचे हुए टुकड़े और दवाइयों का पैकेट भी जब्त किया था।

इन सबूतों के साथ डॉक्टरों की मेडिकल रिपोर्ट ने भी मामले में अहम भूमिका निभाई। चिकित्सा संबंधी साक्ष्यों के आधार पर अदालत के सामने यह बात रखी गई कि भोजन के साथ ब्लेड निगलने की स्थिति में शरीर के भीतर चोट लगने की आशंका रहती है। इस मामले में महिला की आंत में ब्लेड का टुकड़ा मिलने और उसे चिकित्सकीय प्रक्रिया से निकालने के तथ्य भी महत्वपूर्ण साबित हुए।

पत्नी और बेटे ने अदालत में बदल दिए बयान

इस मामले की सुनवाई के दौरान एक अहम मोड़ तब आया, जब शिकायतकर्ता पत्नी और उसके बेटे ने अदालत में अपने पहले के बयान बदल दिए। दोनों ने आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों से इनकार किया और महिला के पेट में दर्द होने की वजह एक होटल में खाना खाने को बताया।

हालांकि, अदालत ने केवल गवाहों के बदले हुए बयानों के आधार पर आरोपी को बरी नहीं किया। मेडिकल रिपोर्ट, दवा विक्रेता की गवाही और पुलिस द्वारा जब्त किए गए सामान सहित अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया।

गवाह के मुकरने पर भी मिल सकती है सजा- अदालत की अहम टिप्पणी

अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी पीड़ित या गवाह के बयान से मुकर जाने का मतलब यह नहीं है कि पूरा मुकदमा खत्म हो जाता है। यदि मेडिकल और परिस्थितिजन्य साक्ष्य अपराध की कड़ियों को जोड़ते हैं, तो गवाह के बयान के विश्वसनीय हिस्सों पर भरोसा करके आरोपी को दोषी ठहराया जा सकता है।

इस फैसले में सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के पूर्व निर्णयों का भी आधार लिया गया। अदालत ने कहा कि किसी गवाह के बयान का एक हिस्सा गलत साबित होने से उसका पूरा बयान स्वतः झूठा नहीं माना जा सकता। यदि उसके बयान के कुछ हिस्सों को अन्य स्वतंत्र साक्ष्यों का समर्थन मिलता है, तो उन्हें दोषसिद्धि के लिए ध्यान में रखा जा सकता है।

इस तरह, पत्नी और बेटे के बयान बदलने के बावजूद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों को महत्वपूर्ण मानते हुए सोमनाथ सपकाल को सात साल के सश्रम कारावास और 70 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।