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शिवसेना विवाद: मामला फिर विधानसभा अध्यक्ष के पास भेजने की मांग, लेकिन शिंदे गुट ने विधायकों की अयोग्यता की मांग को बताया बेअसर

Shiv Sena Case: शिवसेना विवाद से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में एकनाथ शिंदे गुट के वकील ध्रुव मेहता ने दलील दी कि विधायकों की अयोग्यता पर फैसला लेने का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष के पास है। उन्होंने कहा कि विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने के कारण अब अयोग्यता की मांग निष्फल हो गई है।
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मुंबई

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Imran Ansari

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Updated: 4 Nov 2026, 6:11 PM IST

Shiv Sena Case

शिवसेना का मामला फिर विधानसभा अध्यक्ष के पास भेजने की मांग, फोटो सोर्स- ANI

Uddhav Thackeray: शिवसेना पार्टी, चुनाव चिह्न और विधायकों की अयोग्यता से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की ओर से वरिष्ठ वकील ध्रुव मेहता ने दलीलें पेश कीं। उन्हें अपनी बात रखने के लिए आधे घंटे का समय दिया गया था। सुनवाई के दौरान पीठ ने बताया कि आज की कार्यवाही दोपहर सवा तीन बजे तक ही चलेगी। इस पर मेहता ने कहा कि उन्हें जितना समय मिलेगा, उसमें वे अपना पक्ष रखेंगे।

करीब आधे घंटे की सुनवाई के बाद मामले की अगली सुनवाई दिवाली के बाद तय की गई है। ध्रुव मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से 19 तारीख को सुनवाई नहीं रखने का अनुरोध भी किया। आज उनकी दलीलें मुख्य रूप से विधायकों की अयोग्यता और विधानसभा अध्यक्ष के अधिकारों पर केंद्रित रहीं।

विधानसभा अध्यक्ष को अयोग्यता पर फैसला लेने का अधिकार: मेहता

ध्रुव मेहता ने विधायकों की अयोग्यता के मामले में सुप्रीम कोर्ट के सुभाष देसाई और राजेंद्र सिंह राणा फैसलों का हवाला दिया। उन्होंने दलील दी कि सुभाष देसाई मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि विधायकों की अयोग्यता पर फैसला लेने का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष के पास है। उन्होंने कहा कि दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता से जुड़े मामलों में अध्यक्ष को अधिकार प्राप्त हैं।

मेहता ने यह भी कहा कि व्हिप नियुक्त करने का अधिकार राजनीतिक दल का होता है। उन्होंने अदालत के सामने संबंधित दस्तावेजों का हवाला देते हुए दोहराया कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही अयोग्यता के मामले में निर्णय लेने की जिम्मेदारी विधानसभा अध्यक्ष को सौंपी है।

भरत गोगावले की नियुक्ति और व्हिप को सही बताया

शिंदे गुट की ओर से दलील दी गई कि एकनाथ शिंदे शिवसेना के विधायक दल के नेता थे और उनके नेतृत्व में 21 जून 2022 को विधायकों की बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में बहुसंख्यक विधायकों की सहमति से भरत गोगावले को मुख्य सचेतक (प्रतोद) नियुक्त किया गया था। इसलिए गोगावले की ओर से जारी किया गया व्हिप सही था।

विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने से अयोग्यता की मांग निष्फल: शिंदे गुट

ध्रुव मेहता ने दलील दी कि दसवीं अनुसूची के तहत किसी विधायक की अयोग्यता पर फैसला लेने का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष के पास है। यदि अध्यक्ष के फैसले में कोई त्रुटि हो, तो सामान्य तौर पर मामले को दोबारा विचार के लिए अध्यक्ष के पास भेजना उचित रास्ता होता है।

हालांकि, उन्होंने कहा कि विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, इसलिए अब विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग निष्फल हो जाती है। मेहता ने यह दावा भी किया कि विधानसभा अध्यक्ष का अयोग्यता संबंधी फैसला चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद से भी जुड़ा हुआ है। ये सभी दलीलें शिंदे गुट की ओर से सुप्रीम कोर्ट में रखी गईं।