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Delhi Protest: मोदी-शाह पर दीपके के तीखे सवाल, बोले- अपने ही लोगों से क्यों डर रही सरकार?

Cockroach Janata Party: क्या शांतिपूर्ण विरोध के लिए भी लोगों को हिरासत का डर सताना चाहिए? अभिजीत दीपके के बयान ने इसी सवाल को बहस के केंद्र में ला दिया है। उन्होंने लोकतंत्र, निष्पक्ष चुनाव और नागरिक अधिकारों के मुद्दे पर पीछे न हटने का ऐलान किया है।
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भारत

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Manoj Vashisth

•

Oct 10, 2026

Abhijit Dipke

Abhijit Dipke

Abhijit Dipke Delhi Protest: दिल्ली में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाता नजर आ रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार और दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि प्रदर्शन को रोकने के लिए परिवहन सेवाओं पर पाबंदियां लगाई गईं, इंटरनेट बंद किया गया और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई। दिपके ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ते हुए साफ कहा कि गिरफ्तारी की आशंका भी उनके कदम पीछे नहीं खींचेगी।

विरोध रोकने की कोशिश का आरोप, सरकार से पूछे तीखे सवाल

दिल्ली में होने वाले विरोध प्रदर्शन पर राजनीति तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार की सुरक्षा तैयारियों पर सीधे सवाल उठा दिए हैं। उनका कहना है सरकार प्रदर्शन को रोकने के लिए बसें और मेट्रो बंद कर रही है, इंटरनेट काट दिया गया है, सड़कों पर भारी पुलिस दिखाई दे रही है। दीपके साफ कहते हैं, गिरफ्तारी का डर उन्हें नहीं रोक सकता, ये सब लोकतांत्रिक अधिकारों पर चोट है।

दीपके ने खुलकर सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार जनता की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। रेलवे, मेट्रो, सड़कों का बंद होना और इंटरनेट का काटना इन सब से सीधे-सीधे आम लोगों की जिंदगी और उनकी भागीदारी पर असर पड़ता है।

उन्होंने ये भी दावा किया कि जम्मू-कश्मीर से सेना और नक्सल क्षेत्रों से CRPF के जवान दिल्ली बुलाए गए हैं। दिपके ने सीधे प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से पूछा क्या अपने ही देश के लोगों के विरोध को दबाने के लिए इतना बड़ा बंदोबस्त वाकई जरूरी है?

उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का भी जिक्र करते हुए पूछा कि क्या उनके पद से जुड़ा कोई ऐसा कारण है, जिसके चलते नागरिकों के खिलाफ इतनी सख्ती की जा रही है।

घरों तक पहुंच रही पुलिस? दिपके ने उठाया मौलिक अधिकारों का मुद्दा

दीपके ने दावा किया कि लोगों को प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के लिए आवासीय सोसायटियों में घोषणाएं की जा रही हैं और पुलिस घरों तक जाकर लोगों को विरोध से दूर रहने के लिए कह रही है। उन्होंने इन कथित कदमों पर सवाल उठाते हुए कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना नागरिकों का अधिकार है।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 19(1)(b) शांतिपूर्ण तथा बिना हथियार सभा करने का अधिकार देता है। हालांकि, इन अधिकारों पर कानून के तहत उचित प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं। इसलिए किसी प्रदर्शन पर पाबंदी की वैधता संबंधित आदेश, परिस्थितियों और लागू कानूनों पर निर्भर करती है।

गिरफ्तारी हुई तो भी पीछे नहीं हटेंगे

दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने पर संभावित गिरफ्तारी के सवाल पर दीपके ने कहा कि यदि अधिकारी उन्हें हिरासत में लेना या गिरफ्तार करना चाहते हैं, तो वे इसके लिए तैयार हैं। उन्होंने UAPA और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) का उल्लेख करते हुए कहा कि कानूनी कार्रवाई की आशंका के बावजूद उनका संघर्ष जारी रहेगा।

दीपके ने अपने रुख को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव तथा लोकतंत्र की रक्षा से जोड़ते हुए कहा कि वह अपने उद्देश्य से पीछे नहीं हटेंगे।

अब निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर

इस पूरे मामले में परिवहन सेवाओं पर कथित पाबंदियों, सुरक्षा बलों की तैनाती और प्रदर्शनकारियों को दी गई चेतावनियों से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। प्रशासन का पक्ष और संबंधित आदेश सामने आने पर ही स्थिति की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, दिपके के बयान ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन, सार्वजनिक व्यवस्था और नागरिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है।