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BJP में शामिल हुए 2 MLC के खिलाफ विधान परिषद पहुंची जन सुराज, सभापति को याचिका सौंप की कार्रवाई की मांग

Bihar MLC dispute: बिहार विधान परिषद के निर्दलीय सदस्य बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज के BJP में शामिल होने के फैसले को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जन सुराज के एक प्रतिनिधिमंडल ने सभापति रामबचन राय को एक याचिका सौंपकर उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की है। जन सुराज के नेता रामबली सिंह चंद्रवंशी ने दावा किया है कि सभापति ने उन्हें आश्वासन दिया है कि कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
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पटना

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Anand Shekhar

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Updated: 2 Nov 2026, 1:34 PM IST

Bihar MLC Controversy

सभापति के पास पहुंचा जन सुराज प्रतिनिधिमंडल (फोटो- X@shivamjournal)

Bihar MLC Controversy: बिहार विधान परिषद चुनाव परिणाम के बाद दो निर्दलीय सदस्यों के भाजपा में शामिल होने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सोमवार को जन सुराज पार्टी का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल विधान परिषद पहुंचा। पूर्व MLC प्रो. रामबली सिंह चंद्रवंशी के नेतृत्व में इस प्रतिनिधिमंडल ने विधान परिषद के सभापति से मुलाकात की और सबूतों के साथ एक याचिका सौंपी। जन सुराज ने मांग की है कि तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए बंशीधर ब्रजवासी और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए राहुल राज की विधान परिषद सदस्यता को दल-बदल विरोधी कानून के तहत तुरंत रद्द किया जाए।

सभापति को सौंपे सबूत

विधान परिषद् के बाहर मीडिया से बात करते हुए जन ​​सुराज के नेता रामबली सिंह चंद्रवंशी ने कहा कि बिहार लोकतंत्र की जननी रहा है और लोकतंत्र जन नैतिकता और जवाबदेही पर टिका होता है। पूरे देश ने देखा कि ये दोनों सदस्य अपने चुनाव के 72 घंटे के भीतर ही BJP कार्यालय पहुंच गए थे। उन्होंने औपचारिक रूप से सदस्यता ली, जिसकी रसीद भी मिली और पार्टी का स्कार्फ भी पहना। हालांकि, जब कानूनी कार्रवाई का डर सताने लगा, तो BJP के प्रदेश अध्यक्ष ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से उनकी सदस्यता से जुड़ी पोस्ट डिलीट कर दी और दावा किया कि वे तो बस अपना समर्थन देने आए थे। सदस्यता रसीद नंबर का हवाला देते हुए चंद्रवंशी ने कहा कि सभी सबूत सभापति को सौंप दिए गए हैं और अब इस मामले को दबाने की कोई भी कोशिश काम नहीं आएगी।

संवैधानिक संशोधन और 10वीं अनुसूची का जिक्र

दल-बदल विरोधी कानून की तकनीकी बारीकियों को समझाते हुए चंद्रवंशी ने अपने खुद के मामले का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, "तीन साल पहले इसी विधान परिषद में मुझे भी दलबदल विरोधी कानून के तहत हटा दिया गया था। भले ही पार्टी-आधारित व्यवस्था में कुछ लचीलापन या व्याख्या की गुंजाइश हो सकती है, लेकिन 52वें संवैधानिक संशोधन के तहत निर्दलीय चुने गए सदस्यों के मामले में कानून बिल्कुल स्पष्ट है। यदि कोई निर्दलीय सदस्य किसी राजनीतिक दल में शामिल होता है, तो उसकी सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त मानी जाती है। इसमें किसी भी तरह के अगर-मगर या अलग व्याख्या की कोई गुंजाइश नहीं है।"

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