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‘प्रयागराज-जंतर मंतर जा सकते हैं, तो रांची क्यों नहीं?’ हेमंत सोरेन को राहुल गांधी की चिट्ठी पर बोले बाबूलाल मरांडी

Rahul Gandhi letter to Hemant Soren : बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी ने झारखंड में JPSC-JSSC उम्मीदवारों के आंदोलन को लेकर राहुल गांधी द्वारा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखे गए पत्र पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पत्र लिखने के बजाय राहुल गांधी को रांची आकर प्रदर्शन कर रहे युवाओं से मिलना चाहिए।
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babulal marandi and rahul gandhi

झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (फोटो- ANI)

Babulal Marandi on Rahul Gandhi: झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) और झारखंड स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक को लेकर रांची में चल रहे प्रदर्शन के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर प्रदर्शनकारी छात्रों से मिलने और उनकी शिकायतों का समाधान करने की सलाह दी थी, जिस पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पलटवार किया है। झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी और BJP प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने राहुल गांधी के पत्र को महज एक दिखावा और युवाओं को गुमराह करने की कोशिश बताया है।

1 घंटा 40 मिनट की दूरी, फिर भी फुर्सत नहीं- बाबूलाल मरांडी

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राहुल गांधी की मांगें केवल जनता और छात्रों की आंखों में धूल झोंकने जैसी हैं। प्रदर्शन स्थल पर एक छात्रा के बयान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब राहुल गांधी उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और दिल्ली के जंतर-मंतर जाकर छात्रों के बीच खड़े हो सकते हैं, तो दिल्ली से मात्र एक घंटा चालीस मिनट की हवाई दूरी तय करके रांची क्यों नहीं आ सकते।

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राहुल गांधी को आधा घंटा समय निकालकर अनशन पर बैठे छात्र-छात्राओं के बीच पहुंचना चाहिए था, जिससे वे सीधे समझ पाते कि परीक्षाओं में किस स्तर की गड़बड़ियां हुई हैं। तंज कसते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बात करने के लिए एक फोन कॉल ही काफी हो सकता था, लेकिन केवल पत्र लिखकर औपचारिकता निभाना यह दिखाता है कि कांग्रेस को छात्रों के दर्द की कोई चिंता नहीं है।

छात्रों ने सीएम आवास घेराव का बनाया प्लान, तो सरकार ने दिखाई दिलचस्पी- बाबूलाल मरांडी

बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन तभी जागता है जब छात्र अपने आंदोलन को तेज करने या कोई कड़ा कदम उठाने की योजना बनाते हैं। उन्होंने बताया कि जब छात्रों ने विधानसभा का घेराव करने की योजना की घोषणा की, तो बातचीत का दिखावा करने के लिए जल्दबाजी में एक समिति बनाई गई और उसके बाद प्रदर्शनकारियों पर सख्ती की गई।

बाबूलाल मरांडी ने आगे कहा कि इसके बाद भी जब छात्र पांच दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठे रहे, तो सरकार मूकदर्शक बनी रही। अब जाकर, जब छात्रों ने मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने का प्लान बनाया है, सरकार बातचीत में फिर से दिलचस्पी दिखा रही है। इससे साफ पता चलता है कि सरकार मुद्दों का ठोस समाधान खोजने के बजाय सबको केवल टहला रही है।

चिट्ठी लिखने के बजाय छात्रों से मिलें- भाजपा प्रवक्ता

वहीं, बीजेपी प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने भी राहुल गांधी पर सवाल उठाए और कहा कि कांग्रेस झारखंड सरकार में बराबर की साझेदार है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को चिट्ठी-पत्री की राजनीति बंद करनी चाहिए और रांची आकर सड़कों पर विरोध कर रहे छात्रों से सीधे बात करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस गैर-बीजेपी शासित राज्यों को लेकर दोहरे मापदंड अपनाती है, जो अब युवाओं के सामेन आ गया है।

राहुल गांधी के पत्र में क्या था?

राहुल गांधी ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर कहा था कि कांग्रेस पार्टी शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने के अधिकार का पूरा समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि झारखंड में छात्रों का आंदोलन शांतिपूर्ण है और उनकी मांगें जायज हैं। राहुल गांधी ने लिखा कि हालांकि राज्य सरकार की बनाई कमेटी के जरिए कई मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ी है, लेकिन भूख हड़ताल अभी भी जारी है। इसलिए मुख्यमंत्री को छात्रों के प्रतिनिधियों से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनकी बाकी चिंताओं का समाधान करना चाहिए।