14 अक्टूबर 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

जब परमाणु युद्ध से सिर्फ एक कदम दूर थी दुनिया, सोवियत संघ के गुप्त साजिश से हिल गया था अमेरिका

Cuban Missile Crisis 1962: 1962 में क्यूबा में सोवियत मिसाइलों से दुनिया परमाणु युद्ध के करीब पहुंची। जानें ख्रुश्चेव ने क्यूबा को क्यों चुना और कैनेडी ने संकट कैसे टाला।
3 min read
Google source verification
Cuba

क्यूबा मिसाइस संकट (फोटो- AI जेनेरेटेड प्रतिकात्मक)

Khrushchev's Cuban missile plan: सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद दुनिया दो ध्रुवों में बंट चुकी थी। सोवियत संघ और अमेरिका दुनिया के देशों पर प्रभाव जमाने में जुटे हुए थे। अमेरिका के फ्लोरिडा के समुद्री तट से महज 140 किलोमीटर दूर क्यूबा पर फिदेल कास्त्रो के नेतृत्व में वामपंथी सरकार काबिज थी। CIA ने क्यूबा से लेफिस्ट सरकार को हटाने के लिए कई साजिशें भी रची, लेकिन वह नाकाम रही। विशाल अमेरिकी साम्राज्य से लोहा लेने के लिए आखिरकार फिदेल कास्त्रो ने सोवियत संघ के नेता निकिता ख्रुश्चेव की मदद की पेशकश स्वीकार कर ली थी और यहीं से क्यूबा मिसाइल क्रासिस की शुरुआत हुई। जिसने दुनिया को परमाणु युद्ध के करीब पहुंचा दिया था।

क्यूबा 400 साल तक रहा स्पेन का उपनिवेश

क्यूबा साल 1492 से अगले चार सदी तक स्पेन का उपनिवेश रहा। 1898 के स्पेनिश-अमेरिकी युद्ध में स्पेन की हार हुई और अमेरिका का प्रभाव बढ़ा। 1902 में क्यूबा औपचारिक रूप से स्वतंत्र हुआ, लेकिन प्लैट संशोधन के कारण अमेरिका का दखल बना रहा। साल 1952 में फुलगेंशियो बतिस्ता ने तख्तापलट कर सत्ता संभाली। उनके शासन में भ्रष्टाचार, असमानता और दमन बढ़ा। इसके खिलाफ फिदेल कास्त्रो ने बिगुल फूंक दिया। कास्त्रो ने 1953 में मोनकाडा बैरक पर असफल हमला किया और जेल गए। रिहाई के बाद वे मेक्सिको गए, जहां चे ग्वेरा जैसे साथियों से मिले। 1956 में ग्रानमा नाव से लौटकर उन्होंने सिएरा माएस्त्रा के पहाड़ों से गुरिल्ला युद्ध छेड़ा। जनसमर्थन बढ़ने पर 1 जनवरी 1959 को बतिस्ता देश छोड़कर भाग गए। इसके बाद कास्त्रो ने क्यूबा की कमान अपने हाथों में संभाल ली।

Cold War nuclear crisis: क्यूबा में कास्त्रो के सत्ता संभालते ही सोवियत संघ को मिला मौका

क्यूबा में जैसे ही कास्त्रो के नेतृत्व में वामपंथी सरकार बनी, सोवियत संघ के प्रधानमंत्री व नेता निकिता ख्रुश्चेव ने क्यूबा में मिसाइलें तैनात करने की गुप्त योजना को अमल में लाने में जुट गए। दरअसल, साल 1962 में सोवियत संघ न्यूक्लियर हथियार की रेस में अमेरिका से काफी पीछे था। उसके पास तब अमेरिका तक पहुंचने वाली लंबी दूरी की मिसाइलें कम थीं। जबकि, अमेरिका ने तुर्की और इटली में सोवियत संघ के पास अपनी मिसाइलें तैनात कर रखी थीं। ख्रुश्चेव अमेरिका को वही स्थिति महसूस कराना चाहते थे। इसलिए ख्रुश्चेव ने अप्रैल 1962 के आखिर में क्यूबा में मध्यम दूरी की मिसाइलें रखने का विचार सोचा। क्योंकि तब क्यूबा से अमेरिकी भूमि पर निशाना साधना आसान हो जाता।

सोवियत संघ ने ऑपरेशन अनादिर लॉन्च किया

इधर, क्यूबा पर अमेरिकी दबाव लगातार बढ़ रहा था। साल 1961 में CIA का ऑपरेशन मंगूज असफल होने के बाद अमेरिका ने फरवरी 1962 में कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए। जिसके चलते क्यूबा, सोवियत संघ के और करीब पहुंच गया। क्यूबा और सोवियत संघ के इस गठबंधन ने इस द्विपीय देश को शीत युद्ध के एक हॉट-स्पॉट में बदल दिया था। फिर अमेरिकी इंटेलिजेंस को कई रिपोर्टें मिल रही थी, जिसने अमेरिकी खुफिया अधिकारियों को चौंका दिया।

अमेरिकी रिपोर्टों के अनुसार, कई ऐसे जहाज भी लगातार क्यूबा आ रहे थे, जिनके दस्तावेज भी पूरे नहीं थे और न ही उन पर लदे सामान का वजह बंदरगाह पर बताए गए वजन से मेल खा रहा था। सोवियत संघ के नौसैनिक अड्डों और क्यूबा के बीच सामुद्रिक गतिविधियां बढ़ गई थीं। इस वजह से अमेरिकी खुफिया विभाग ने क्यूबा पर निगरानी तेज कर दी। 14 अक्टूबर 1962 को अमेरिकी U-2 जासूसी विमान ने क्यूबा के ऊपर से उड़ान भरी। उसने कई ऐसी तस्वीरें ली, जिससे पता चला कि सोवियत संघ ने क्यूबा में परमाणु मिसाइलें तैनात कर दी हैं। इस जानकारी के आधार पर केनेडी ने क्यूबा की नौसैनिक नाकाबंदी शुरू कर दी। इस नाकांबदी का मकसद और मिसाइलों को क्यूबा पहुंचने से रोकना था और सोवियत संघ से बातचीत के लिए समय निकालना था।

Kennedy-Khrushchev letters: कैसे खत्म हुआ क्यूबा मिसाइल संकट?

26 अक्टूबर सोवियत संघ के नेता निकिता ने अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी को पहला पत्र भेजा। उन्होंने इस शर्त पर क्यूबा से मिसाइल वापस लेने का प्रस्ताव दिया कि इसके बदले अमेरिका क्यूबा पर आक्रमण न करने का सार्वजनिक वादा करे। इसके अगले दिन यानी 27 अक्टूबर को निकिता ने दूसरा पत्र कैनेडी को भेजा, जिसमें उन्होंने तुर्किये से न्यूक्लियर मिसाइल हटाने की शर्त जोड़ दी। उसी दिन क्यूबा में एक अमेरिकी U-2 विमान को सोवियत मिसाइल से मार गिराया गया, जिससे तनाव और बढ़ गया, लेकिन कैनेडी प्रशासन ने अंतत: कूटनीतिक रास्ता अपनाया। अमेरिका ने दोनों शर्तें मान ली। क्यूबा पर आक्रमण न करने का औपचारिक वादा किया। साथ ही, गुप्त रूप से तुर्की से जुपिटर मिसाइलें हटाने पर सहमति जताई। इसके बाद 28 अक्टूबर 1962 को ख्रुश्चेव ने रेडियो मॉस्को पर घोषणा की कि सोवियत संघ क्यूबा से मिसाइलें वापस ले लेगा। उन्होंने कहा कि वे “शांति के हित में” यह कदम उठा रहे हैं। 1963 में आंशिक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि पर भी हस्ताक्षर हुए।

बड़ी खबरें

View All

राष्ट्रीय

ट्रेंडिंग