
Delhi High Court Contempt Case : दिल्ली HC में फिर पलटा ट्वीट विवाद: केजरीवाल और सौरव दास के पोस्ट पर याचिकाकर्ता ने उठाए सवाल (फोटो सोर्स:@barandbench)
Arvind Kejriwal Contempt Case: दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति स्वर्णा कांता शर्मा से जुड़े कथित आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट का विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। आपराधिक अवमानना याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता अशोक चैतन्य ने अदालत को बताया कि अरविंद केजरीवाल, सौरव दास और अन्य संबंधित लोगों के कथित आपत्तिजनक ट्वीट अब भी हटाए नहीं गए हैं। खास बात यह है कि पिछली सुनवाई में पोस्ट हटाए जाने की बात कही गई थी। इसी विरोधाभास ने सोमवार की सुनवाई को अहम बना दिया है।
दिल्ली हाईकोर्ट में सोमवार को उस आपराधिक अवमानना मामले की सुनवाई के दौरान सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर अहम दावा सामने आया, जिसमें पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पत्रकार सौरव दास और अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। याचिकाकर्ता अधिवक्ता अशोक चैतन्य ने अदालत को बताया कि जिन ट्वीट्स को कथित तौर पर आपत्तिजनक और न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को प्रभावित करने वाला बताया गया है, वे अभी भी मौजूद हैं।
इस दावे ने मामले में एक नया पेच पैदा कर दिया है। दरअसल, इससे पहले हुई सुनवाई में चैतन्य की ओर से अदालत को बताया गया था कि संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट हटा दिए गए हैं। अगस्त में हुई सुनवाई के दौरान भी पोस्ट हटाए जाने के दावे को लेकर डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य अदालत के समक्ष रखने का निर्देश दिया गया था।
मामला अधिवक्ता अशोक चैतन्य की उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें केजरीवाल, सौरव दास और आम आदमी पार्टी के कुछ नेताओं पर न्यायमूर्ति स्वर्णा कांता शर्मा को लेकर सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक सामग्री साझा करने और बढ़ाने के आरोप लगाए गए हैं। मई में दिल्ली हाईकोर्ट ने सौरव दास और आप नेता गोपाल राय को नोटिस जारी किया था। केजरीवाल और सौरभ भारद्वाज को पहले से ही इसी विवाद से जुड़ी स्वत: संज्ञान वाली आपराधिक अवमानना कार्यवाही में नोटिस मिल चुका था।
इस विवाद की पृष्ठभूमि दिल्ली आबकारी नीति मामले की सुनवाई से जुड़ी है। न्यायमूर्ति स्वर्णा कांता शर्मा के समक्ष मामले में कुछ आरोपियों की ओर से उनके मामले से अलग होने यानी रिक्यूजल की मांग की गई थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर न्यायाधीश की भूमिका और कथित हितों के टकराव को लेकर टिप्पणियां सामने आईं। चैतन्य की याचिका में आरोप लगाया गया कि इन पोस्टों के जरिए न्यायपालिका की निष्पक्षता और प्रतिष्ठा पर सवाल उठाने वाला माहौल बनाया गया। हालांकि, ये सभी आरोप अभी न्यायिक विचाराधीन हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने मई में इस मामले को पहले से लंबित स्वत: संज्ञान वाली अवमानना कार्यवाही के साथ जोड़ने का फैसला किया था। अदालत ने सोशल मीडिया सामग्री को सुरक्षित रखने का निर्देश भी दिया था, ताकि आगे की सुनवाई में डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जा सके। बाद की सुनवाई में सभी संबंधित पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया गया।
अब सोमवार की सुनवाई में ट्वीट्स की वास्तविक स्थिति को लेकर सामने आया नया दावा मामले की अगली दिशा के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। अदालत के सामने मुख्य रूप से डिजिटल रिकॉर्ड, पोस्ट की उपलब्धता और संबंधित पक्षों के जवाब जैसे पहलू रहेंगे। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें सोशल मीडिया पर न्यायिक कार्यवाही की आलोचना और आपराधिक अवमानना की कानूनी सीमा से जुड़े सवाल उठ रहे हैं।
Updated on:
21 Sept 2026 12:26 pm
Published on:
21 Sept 2026 12:10 pm
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