
स्वस्थ्य होने के बाद दोस्तों के साथ विकास। फोटो- पत्रिका
सूरत। दोस्ती की असली पहचान सुख में साथ खड़े होने से नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में उसके लिए आगे आने से होती है। पांडेसरा में युवाओं के एक समूह ने दोस्ती की ऐसी ही मिसाल पेश की है, जिसने गणपति उत्सव की खुशियों को एक दोस्त की जिंदगी बचाने की खुशी में बदल दिया। जिस रकम से गणपति की स्थापना और उत्सव की तैयारियां होनी थीं, दोस्तों ने वही पूरी रकम अपने घायल साथी के इलाज में लगा दी।
दरअसल पांडेसरा में जय महादेव सेवा संघ के सदस्य विकास पांडे करीब 20-25 दिन पहले सड़क हादसे में जख्मी हो गया था और उनका हाथ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। दोस्त उन्हें सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने हाथ काटने की संभावना जताई। विकास के परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत नहीं थी। घर में कमाने वाला कोई दूसरा सदस्य नहीं होने के कारण महंगे इलाज का खर्च उठाना परिवार के लिए मुश्किल था।
संघ के सदस्य अनिल महाराणा ने बताया कि वे गणपति की मूर्ति लेने गए थे, तभी विकास के हादसे की खबर मिली। विकास हमेशा दोस्तों को हंसाने वाला और मिलनसार था। अचानक उसके साथ हुए हादसे ने सभी को झकझोर दिया। सिविल अस्पताल में हाथ काटने की बात सामने आने के बाद दोस्तों ने निजी अस्पताल में इलाज कराने का निर्णय लिया। निजी अस्पताल में जांच के बाद अगले दिन विकास का ऑपरेशन किया गया। इलाज में डॉ. दिलीप वरैया का भी महत्वपूर्ण सहयोग मिला। गंभीर चोट के बावजूद चिकित्सकों ने प्रयास कर विकास का हाथ बचा लिया।
दोस्तों के सामने सवाल था कि हर साल की तरह इस बार गणपति का बड़ा उत्सव करें या दोस्त के इलाज का खर्च उठाएं। उन्होंने बप्पा की स्थापना का कार्यक्रम रद्द कर दिया और उत्सव के लिए जमा किए गए करीब 1.50 लाख रुपए विकास के इलाज में लगा दिए। दोस्तों का कहना है कि भक्ति सिर्फ बड़ी सजावट और आयोजन का नाम नहीं है। जरूरत के समय किसी के काम आना ही सच्ची सेवा है। उनका कहना था कि बप्पा तो हमारे दिल में बसे हैं। इस अनुभव के बाद उन्होंने तय किया है कि भविष्य में गणपति बप्पा का आगमन तो होगा ही, साथ ही जरूरतमंदों की मदद और सेवा कार्य को भी उत्सव का हिस्सा बनाया जाएगा।
Updated on:
21 Sept 2026 02:48 pm
Published on:
21 Sept 2026 02:47 pm
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