
अग्निपथ योजना पर 27 फरवरी को फैसला सुनाएगा दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहाकि, वह सशस्त्र बलों में भर्ती के लिए केंद्र की अग्निपथ योजना को चुनौती देने वाली तीन याचिकाओं पर 27 फरवरी को अपना फैसला सुनाएगा। अग्निपथ योजना, इसकी भर्ती प्रक्रिया और उम्मीदवारों की नियुक्ति को चुनौती देते हुए याचिकाओं के बैच दायर किए गए हैं। चार साल के लिए युवाओं को भारतीय सेना में भर्ती करने के लिए बनाई गई इस योजना के बाद इस अवधि के बाद चयनित उम्मीदवारों में से केवल 25 प्रतिशत को ही रखा जाएगा। मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने 15 दिसंबर को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। हाईकोर्ट ने वकीलों से छुट्टियों से पहले अपनी लिखित दलीलें पेश करने को कहा था। केंद्र ने कहा था कि, वह अग्निवीरों की भूमिका, जिम्मेदारियों और पदानुक्रम पर हलफनामा दायर करेंगे।
अग्निवीर नियमित कैडर से अलग कैडर, ऐश्वर्या भाटी का जवाब
हाई कोर्ट ने 14 दिसंबर को भारतीय सेना में अग्निवीरों और नियमित सिपाहियों (सैनिकों) के लिए अलग-अलग वेतनमान के केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाया था, अगर उनका कार्यक्षेत्र समान है। केंद्र का प्रतिनिधित्व करते हुए, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा था कि अग्निवीर नियमित कैडर से अलग कैडर है।
जॉब प्रोफाइल समान तो वेतन एक क्यों नहीं
जवाब में उसी खंडपीठ ने कहा था, अलग-अलग कैडर जॉब प्रोफाइल का जवाब नहीं देते, सवाल काम और जिम्मेदारी का है। यदि जॉब प्रोफाइल समान है, तो आप अलग-अलग वेतन को कैसे उचित ठहरा सकते हैं? बहुत कुछ जॉब प्रोफाइल पर निर्भर करेगा। इस पर निर्देश प्राप्त कर हलफनामे पर लगाएं।
सैनिकों से अलग होती हैं अग्निवीरों के नियम, शर्तें और जिम्मेदारियां
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा था कि, अग्निवीरों के नियम, शर्तें और जिम्मेदारियां सैनिकों से अलग होती हैं। अग्निवीर कैडर को एक अलग कैडर के रूप में बनाया गया है। इसे नियमित सेवा के रूप में नहीं गिना जाएगा। चार साल तक अग्निवीर के रूप में सेवा करने के बाद, यदि वह स्वेच्छा से काम करते हैं और फिट पाए जाते है, तो नियमित कैडर में उनकी यात्रा शुरू होती है।
केंद्र का पक्ष, जल्दबाजी में नहीं बनाई गई योजना
केंद्र ने कहा था कि यह योजना जल्दबाजी में नहीं बनाई गई है, बल्कि युवाओं के मनोबल को बढ़ाने के लिए और अग्निवीरों की स्किल मैपिंग के लिए काफी अध्ययन के साथ तैयार की गई है। एएसजी ने कहा था कि इस निर्णय को लेने में पिछले दो वर्षों के दौरान बहुत कुछ किया गया है जैसे कई आंतरिक और बाहरी परामर्श, कई बैठकें और परामर्श भी हितधारकों के साथ आयोजित किए गए हैं।
बड़े नीतिगत फैसले पर अधिक छूट की मांग
भाटी ने यह भी तर्क दिया था कि चूंकि भारतीय सशस्त्र बल दुनिया में सबसे अधिक पेशेवर सशस्त्र बल हैं, इसलिए जब वह इस तरह के बड़े नीतिगत फैसले ले रहे हों तो उन्हें बहुत अधिक छूट दी जानी चाहिए। इस योजना पर दायर दर्जनों याचिकाओं के साथ, इसकी शुरूआत से देश भर में लोगों ने विरोध किया। योजना, इसकी भर्ती प्रक्रिया और उम्मीदवारों की नियुक्ति को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई।
चार साल बाद बेरोजगार हो जाएंगे 75 प्रतिशत उम्मीदवार
इस योजना के साथ, केवल 25 प्रतिशत चयनित उम्मीदवारों को ही रखा जाएगा। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि, बाकी 75 प्रतिशत उम्मीदवार चार साल बाद बेरोजगार हो जाएंगे और उनके लिए कोई योजना 'बी' नहीं है। पेश हुए याचिकाकर्ताओं में से एक ने 12 दिसंबर को तर्क दिया था कि- छह महीने में, मुझे शारीरिक सहनशक्ति विकसित करनी है और हथियारों का उपयोग करना सीखना है। छह महीने बहुत कम समय है। हम राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने जा रहे हैं।
क्या अग्निवीरों के कार्यकाल को उनकी समग्र सेवा में गिना जाएगा
इस बारे में भी तर्क दिए गए कि, क्या अग्निवीरों के चार साल के कार्यकाल को उनकी समग्र सेवा में गिना जाएगा, जब उनमें से एक चौथाई सेना में शामिल हो जाएंगे।
Updated on:
25 Feb 2023, 4:20 PM IST
Published on:
25 Feb 2023, 4:17 PM IST
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