
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (बाएं) और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन (Photo-IANS)
BJP On SIR Allegations: चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया पर इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में खुलासे के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज है। विपक्ष द्वारा सीईसी ज्ञानेश कुमार और मोदी सरकार पर आरोप लगाए जा रहे हैं। वहीं विपक्ष ने सीईसी के इस्तीफे की भी मांग की है। वहीं विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर बीजेपीकी तरफ से जवाब दिया जा रहा है। इसके अलावा इस मुद्दे पर बीजेपी ने अपना जवाबी अभियान भी तेज कर दिया है। दरअसल, पार्टी नहीं चाहती कि यह मुद्दा बड़ा जनआंदोलन बने और इसके चलते सड़क पर विरोध प्रदर्शन जैसी स्थिति पैदा हो।
हिंदुस्तान टाइम्स ने एक रिपोर्ट में बताया कि इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में खुलासे के बाद बीजेपी के अंदर इस बात को लेकर चिंता है कि चुनाव प्रक्रिया और वोटर लिस्ट में बदलाव से जुड़े आरोपों को व्यापक जनसमर्थन मिल सकता है।
हालांकि, पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि ऐसे आरोपों का चुनावी असर पड़ने की संभावना कम है। क्योंकि बिहार चुनाव के समय विपक्ष ने SIR के मुद्दे को उठाया था, लेकिन उनको लाभ नहीं मिला। बिहार में एनडीए की सरकार बनी थी।
कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर अनियमितताओं और सत्तारूढ़ बीजेपी के साथ मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। इसके अलावा विपक्ष ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग की है। हालांकि, चुनाव आयोग और बीजेपी दोनों ने विपक्ष के इन आरोपों को खारिज किया है।
हिंदुस्तान टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में बीजेपी नेताओं के हवाले से लिखा कि पार्टी इस मुद्दे को हल्के में नहीं लेना चाहती। उनका तर्क है कि कुछ मुद्दे जाति, स्थानीय सुविधाओं या कल्याणकारी योजनाओं जैसे सीमित दायरे वाले चुनावी मुद्दों से कहीं ज्यादा व्यापक असर डाल सकते हैं।
पार्टी के एक अन्य नेता ने कहा कि शिक्षा, रोजगार और अब पहचान साबित करने की चिंता जैसे मुद्दों का असर समाज के बड़े वर्ग पर पड़ सकता है। इसलिए बीजेपी विपक्ष के आरोपों को शुरुआती स्तर पर ही चुनौती देना चाहती है, ताकि उसके मुताबिक यह एक मजबूत 'फेक नैरेटिव' न बन जाए।
इसी रणनीति के तहत बीजेपी ने चुनाव में धांधली और बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों का जवाब देने के लिए अपना अभियान तेज किया है।
बीजेपी लगातार दावा कर रही है कि SIR मतदाता सूची को दुरुस्त करने और अवैध मतदाताओं की पहचान करने के लिए प्रभावी और कानूनी प्रक्रिया है।
बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने अपने दावे के समर्थन में पश्चिम बंगाल की 20 विधानसभा सीटों का आंकड़ा पेश किया। उन्होंने कहा कि जिन सीटों पर सबसे ज्यादा मतदाताओं के नाम हटाए गए, उनमें से 13 सीटों पर TMC, एक सीट पर कांग्रेस और छह सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की।
पात्रा ने उदाहरण देते हुए कहा कि शमशेरगंज में 74,775, लालगोला में 55,420 और भगवानगोला में 47,493 वोट हटाए गए। उनके मुताबिक, इन सीटों पर TMC ने जीत दर्ज की।
विपक्ष के अलावा बीजेपी अपने कुछ सहयोगी दलों के रुख को लेकर भी सतर्क है। लोक जनशक्ति पार्टी ने चुनाव आयोग से SIR को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
Updated on:
26 Sept 2026 02:45 pm
Published on:
26 Sept 2026 02:44 pm
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