
फोटो में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार (सोर्स: आईएएनएस)
Election Commission:भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की शनिवार को बैठक हुई। आयोग के भीतर आंतरिक मतभेदों की खबर के बाद पहली बार बैठक हुई। इस बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार व दोनों चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधु भी शामिल हुए। इस बैठक में आयोग ने उन मतदाताओं को बड़ी राहत दी है, जिन्हें विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से अनमैप होने या तार्किक विसंगतियों के चलते नोटिस मिला था। आयोग ने कहा कि ऐसे मतदाताओं को अब निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) या सहायक ERO के समक्ष सुनवाई के लिए उपस्थित होने की जरूरत नहीं होगी।
इसके बजाय, EROs और AEROs खुद ऐसे मतदाताओं के घर जाकर जरूरी दस्तावेज एकत्र करेंगे, जिन्हें बाद में ECINet पर अपलोड किया जाएगा और इसी के आधार पर ERO अंतिम निर्णय लेंगे। आयोग ने ECINET सॉफ्टवेयर की स्वतंत्र ऑडिट कराने पर भी सहमति जताई है, हालांकि उसने इन आरोपों को खारिज कर दिया कि EROs को सिस्टम से बाहर रखा जा रहा है।
आयोग ने कहा कि ऑनलाइन सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा, जबकि जिला निर्वाचन अधिकारी पर्याप्त संख्या में हेल्प डेस्क स्थापित करेंगे। गरीबों, मजदूरों, बेघर लोगों तथा रैन बसेरों में रहने वाले लोगों के लिए विशेष शिविर आयोजित करेंगे। SIR के तहत नोटिस पाने वाले मतदाताओं को दी गई यह राहत, प्रभावित मतदाताओं और विपक्ष की उस आलोचना के बाद आई है, जिसमें कहा गया था कि ECINET द्वारा चिह्नित विसंगतियों के कारण वास्तविक नागरिकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
आयोग ने तय किया है कि अब हर बैठक से पहले एजेंडा भेजा जाएगा और बैठक के बाद उसका ब्योरा यानी मिनट्स भी जारी होंगे। अफसरों की विदेश यात्राओं के लिए अब आयोग की मंजूरी अनिवार्य होगी। कोई भी नया आईटी सिस्टम या पोर्टल अब सीधे लागू नहीं होगा, पहले अफसरों की एक कमेटी उसे परखेगी। ECINet सॉफ्टवेयर की समीक्षा एक वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की अगुवाई में बनी कमेटी करेगी, जिसमें आईआईटी या ट्रिपल आईटी का कोई स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल होगा। फील्ड में तैनात अफसरों को अगर सिस्टम में ज्यादा सुविधा चाहिए तो वह भी दी जाएगी।
वहीं, चुनाव आयोग द्वारा दी गई रियायतों के बावजूद भी फॉर्म 6 का मुद्दा पूरी तरह से सुलझता हुआ नजर नहीं आ रहा है। नए नोट में कहा गया है कि पंजीकरण नियमों के तहत तय फॉर्म एसआईआर अवधि के बाहर लागू होगा, लेकिन यह ECINet पर मौजूद उस ऑनलाइन फॉर्म पर खामोश है जिसमें माता-पिता से जुड़ा एक अनिवार्य सवाल जोड़ दिया गया था।
आयोग के ताजा स्पष्टीकरण के बावजूद भी कई सवालों के जवाब अब तक नहीं मिले हैं। गोवा में मतदाताओं के नाम तुरंत बहाल करने वाली सॉफ्टवेयर सुविधा को कभी चालू क्यों नहीं किया गया? जिन अधिकारियों के कामकाज पर चुनाव आयुक्त विवेक और चुनाव आयुक्त सुखबीर ने आपत्ति जताई थी। उनकी भूमिका व पद पर बने रहने को लेकर भी स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की गई।
Updated on:
27 Sept 2026 09:30 am
Published on:
27 Sept 2026 09:30 am
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