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RSS आज हुआ 101 साल का, इतने सालों में केवल छह प्रमुख, कैसे पड़ा था नाम?

RSS 101 years: 27 सितंबर 1925 को नागपुर में स्थापित RSS ने अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से 101 साल पूरे किए। जानें अब तक के 6 सरसंघचालकों की सूची, कैसे पड़ा संघ का नाम, और मौजूदा 6 सह-सरकार्यवाहों के बारे में पूरी जानकारी।
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rss chief mohan bhagwat gave mantra of connecting people know what he said meerut

RSS प्रमुख मोहन भागवत। (फोटो सोर्स-IANS)

Rashtriya Swayamsevak Sangh: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अंग्रेजी कलेंडर के लिहाज से शनिवार को 100 साल का हो गया। अंग्रेजी कलैंडर के अनुसार संघ की स्थापना 27 सितंबर 1925 को नागपुर में हुई थी। उस दिन विजयादशमी (दशहरे) का दिन था और संघ देशी कलेंडर के आधार पर ही स्थापना दिवस मनाता है।

नागपुर से निकलकर आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देश भर में फैल चुका है। संघ के बाग से निकले प्रचारक आज सत्ता के शीर्ष पर काबिज हैं। 101 सालों के सफर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने वह सब हासिल किया है, जोकि किसी भी वैचारिक संस्था के लिए एक ख्वाब देखने जैसा है।

साल 1925 में हुई थी संघ की स्थापना

साल 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने संघ की स्थापना की। तब से लेकर अब तक कुल 6 प्रमुख यानी सरसंघचालक बनें। हेडगेवार 1925 से 1940 तक संघ प्रमुख रहे। इसके बाद माधव सदाशिव गोलवलकर ने RSS की कमान संभाली। वह 1940 से 1973 तक संघ प्रमुख रहे। फिर माधुकर दत्तात्रय देओरस ने लगभग अगले 21 सालों तक हिंदुत्ववादी संगठन की कमान संभाली। फिर राजेंद्र सिंह ने 1994 से 2000 तक नागपुर से संघ का संचालन किया। सिंह के बाद क.एस. सुदर्शन ने अगले नौ सालों तक संघ का संचालन किया। 2009 से अब तक मोहन भागवत संघ प्रमुख की भूमिका में हैं।

6 सह-सरकार्यवाह देखते हैं संघ का काम

RSS में संघ प्रमुख के बाद सबसे अहम पद सह-सरकार्यवाह का होता है। वर्तमान में संघ में कुल 6 सह-सरकार्यवाह हैं। ये संगठन के दैनिक संचालन, क्षेत्रीय समन्वय, और विभिन्न विभागों के प्रबंधन में सहायता करते हैं। सुरेश सोनी, कृष्ण गोपाल, मुकुंद, अरुण कुमार, रामदत्त चक्रधर, अतुल लिमये संघ में सह-सरकार्यवाह हैं।

कैसे पड़ा RSS नाम?

संघ की स्थापना के 7 महीने हो गए थे। डॉ केशव बलिराम हेडगेवार ने 17 अप्रैल 1926 को अपने घर पर एक बैठक बुलाई। इसमें 26 स्वयं सेवक पहुंचे। हेडगेवार ने इस मीटिंग में संगठन के नाम के लिए सुझाव मांगे। काफी चर्चा के बाद तीन नामों को छांटकर निकाला गया। ये तीन नाम थे- ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’, जरी पटका मंडल’ और ‘भारतोद्धार मंडल’। नाम को लेकर वोटिंग हुई। 20 वोटों के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नाम बहुमत से चुना गया।

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