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74 शिक्षक वहां तैनात, जहां पढ़ने वाला एक भी बच्चा नहीं, स्कूलों पर शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट ने किया खुलासा

Gujarat Education: गुजरात के 2,335 स्कूलों में सिर्फ एक शिक्षक होने पर सरकार ने अफसरों को नोटिस भेजा, तो अधिकारियों ने लाचारगी जताते हुए कहा कि उनके पास तबादले का अधिकार ही नहीं है। वहीं, प्रदेश के कुछ स्कूलों में 74 शिक्षक ऐसे तैनात हैं जहां एक भी बच्चा नहीं पढ़ता।
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Gujarat teachers

स्कूल में पढ़ते विद्यार्थी (फोटो-ANI)

Gujarat Teachers: गुजरात के स्कूलों में शिक्षकों की कमी को लेकर एक अहम खबर सामने आई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की हालिया 'यूडाइज प्लस' (UDISE+) रिपोर्ट में गुजरात के स्कूलों में शिक्षकों की कमी और जहां छात्र नहीं है, वहां शिक्षकों की तैनाती का खुलासा हुआ था। इस खुलासे के बाद शिक्षा विभाग ने स्थानीय अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नोटिस के जवाब में अधिकारियों ने अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उनके पास शिक्षकों का तबादला करने या किसी की जगह दूसरे को तैनात करने का अधिकार ही नहीं है।

74 शिक्षक वहां तैनात, जहां पढ़ने वाला एक भी बच्चा नहीं

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट 'यूडाइज प्लस' (UDISE+) में खुलासा हुआ था कि गुजरात के 2,335 स्कूलों में सिर्फ एक ही शिक्षक पूरा स्कूल चला रहा है। ऐसे में एक-एक शिक्षक के सहारे 80,000 से ज्यादा बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं। वहीं, दूसरी ओर राज्य में ऐसे स्कूल भी हैं जहां कुल मिलाकर 74 शिक्षक तैनात हैं, लेकिन इन स्कूलों में पढ़ने वाला एक भी बच्चा नहीं है। यानी इन स्कूलों में शिक्षक तो रोज ड्यूटी पर आते हैं लेकिन पढ़ने के लिए एक भी बच्चा नहीं है।

अधिकारियों को मिले नोटिस

यह खुलासा होने के बाद गुजरात के प्राथमिक शिक्षा निदेशक (DPE) ने सभी जिलों के प्राथमिक शिक्षा अधिकारियों (DPEOs) और प्रशासनिक अधिकारियों (AOs) को नोटिस भेज दिया था। नोटिस में अधिकारियों पर काम में लापरवाही का आरोप लगाते हुए उनकी सैलेरी इंक्रीमेंट रोकने जैसी कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी।

सरकार करे व्यवस्था, हमारे हाथ में कुछ नहीं

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने नोटिस के जवाब में अपनी लाचारी जाहिर की है। कई जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि नियमों के तहत किसी शिक्षक का तबादला करने या उसकी जगह दूसरे शिक्षक को भेजने का प्रशासनिक अधिकार उनके पास है ही नहीं। अधिकारियों का कहना है कि जब उनके पास यह पावर ही नहीं है, तो वे स्कूलों में शिक्षकों की कमी कैसे पूरी कर सकते हैं। यह काम राज्य सरकार के स्तर का है, न कि जिला स्तर के अधिकारियों का।

RTE नियमों का उल्लंघन

शिक्षा विभाग के नोटिस में कहा गया था कि 'शिक्षा का अधिकार कानून' (RTE Act, 2009) के तहत हर स्कूल में छात्रों और शिक्षकों का एक तय अनुपात होना अनिवार्य है। कानून के मुताबिक किसी भी स्कूल को सिंगल-टीचर स्कूल बनाकर नहीं चलाया जा सकता।

शिक्षक तैनात करने की कार्रवाई जारी है

इस मुद्दे पर सफाई देते हुए DPE प्रकाश त्रिवेदी ने बताया कि जिन स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है, वहां अस्थायी शिक्षकों से काम चलाया जा रहा है। वहीं, जिन स्कूलों में एक भी बच्चा नहीं है, उन्हें बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार का यह भी दावा है कि चल रही नई भर्ती प्रक्रिया के जरिए इन एक-शिक्षक वाले स्कूलों में जल्द ही शिक्षकों की तैनाती की जाएगी।

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