
BJP नेता मृत्युंजय तिवारी (फोटो- IANS)
Mrityunjay Tiwari on INDIA Bloc Protest: भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ इंडिया गठबंधन के विरोध मार्च पर तंज कसा है। बीजेपी नेता मृत्युंजय तिवारी ने विपक्षी सांसदों के प्रदर्शन को राजनीतिक नौटंकी करार दिया। उन्होंने कहा कि जनता ने विपक्ष को सत्ता से इतना दूर कर दिया है कि वे अब इसके बिना वैसे ही तड़प रहे हैं, जैसे पानी के बिना मछली तड़पती है। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी नेताओं को अगले 20-25 सालों तक सड़कों पर मार्च करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, क्योंकि उन्हें सत्ता नहीं मिलने वाली है।
पटना में मीडिया से बात करते हुए मृत्युंजय तिवारी ने विपक्ष के विरोध प्रदर्शन की आलोचना की। उन्होंने कहा कि INDIA ब्लॉक के सदस्य अब बस मार्च करते रहेंगे और सड़कों पर ही दिखाई देंगे, उन्हें किसी भी हाल में सत्ता नहीं मिलने वाली है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि होती है और सबसे महत्वपूर्ण काम लोगों का भरोसा और विश्वास जीतना होता है। इन नेताओं ने जनता का भरोसा पूरी तरह खो दिया है और अब वे नौटंकी कर रहे हैं। जो लोग अपनी चुनावी हार का दोष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और EVM पर मढ़ने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें लोगों के बीच जाना चाहिए, जनता असल में उन्हें ही ढूंढ रही है।
विपक्षी दलों पर तंज कसते हुए मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि जैसे मछली पानी के बिना तड़पती है, वैसे ही ये लोग अभी सत्ता के बिना तड़प रहे हैं। इस ड्रामे से कुछ हासिल नहीं होगा। लोकतंत्र में लोगों का दिल जीतना होता है, लेकिन जनता ने उन्हें पूरी तरह नकार दिया है। मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि उन्हें अब सत्ता का सपना देखना छोड़ देना चाहिए, उन्हें अगले 20 से 25 सालों तक सड़कों पर ही भटकना होगा।
CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को जारी नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि संस्थाएं तय नियमों के अनुसार काम करती हैं। उन्होंने कहा कि कोर्ट जो भी तय करेगी, उस पर विचार किया जाएगा और चुनाव आयोग भी सभी बिंदुओं पर अपना आधिकारिक जवाब देगा।
मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि विपक्षी नेताओं की आदत बन गई है कि वे हर संवैधानिक संस्था पर सवाल उठाते हैं, वे अदालत के फैसलों और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हैं। जिन लोगों के पास न तो जनता का समर्थन है और न ही संवैधानिक संस्थाओं के प्रति सम्मान, वे खुद लोकतंत्र और संविधान को कमजोर कर रहे हैं, फिर भी वे अब दूसरों को उपदेश दे रहे हैं।
Updated on:
06 Oct 2026 11:18 am
Published on:
06 Oct 2026 11:08 am
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