
संयुक्त राष्ट्र महासभा (फोटो - CGTN Facebook)
UN Arms Control Draft: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की निरस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित प्रथम समिति ने क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय स्तरों पर हथियारों के नियंत्रण से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया। इस प्रस्ताव को पाकिस्तान और बेलारूस ने संयुक्त रूप से पेश किया था। 193 सदस्य देशों में से 180 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जबकि किसी भी देश ने मतदान से दूरी नहीं बनाई। इस पूरे मतदान में केवल भारत और इजरायल ही दो ऐसे देश रहे जिन्होंने खुलकर इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव अनमोल शेर बेदी ने भारत की ओर से मतदान की वजह स्पष्ट की। बेदी ने कहा कि पारंपरिक हथियारों का नियंत्रण मूल रूप से एक वैश्विक मुद्दा है। उन्होंने बताया कि भारत इस बात से पूरी तरह सहमत नहीं है कि पारंपरिक हथियारों के नियंत्रण को मुख्य रूप से क्षेत्रीय या उप-क्षेत्रीय संदर्भों में ही देखा जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि नई दिल्ली का यह वोट उसके पहले से तय सिद्धांतों के अनुरूप है।
भारतीय राजनयिक ने इस प्रस्ताव पर हैरानी भी जताई, जिसमें संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण आयोग से क्षेत्रीय समझौतों के लिए नए दिशानिर्देश तैयार करने को कहा गया है। बेदी ने कहा कि वह इस अनुरोध को एक तरह की जिज्ञासा के साथ देख रहे हैं।
उन्होंने बताया कि निरस्त्रीकरण आयोग इस विषय पर पहले ही आम सहमति से तीन महत्वपूर्ण दस्तावेज अपना चुका है, 1993 के क्षेत्रीय निरस्त्रीकरण के लिए दिशानिर्देश, 1999 के पारंपरिक हथियार नियंत्रण और निरस्त्रीकरण के लिए दिशानिर्देश और 2017 की पारंपरिक हथियारों के क्षेत्र में व्यावहारिक विश्वास-निर्माण उपायों पर सिफारिशें।
बेदी ने सवाल किया कि जब इसी निकाय के भीतर पहले ही तीन बार आम सहमति बन चुकी है, तो फिर से शुरुआत करने की क्या जरूरत है। उनके मुताबिक, इससे संयुक्त राष्ट्र की निरस्त्रीकरण व्यवस्था को अनावश्यक रूप से व्यस्त रखने का जोखिम है।
भारत ने इस प्रस्ताव के मूल आधार पर कड़ी आपत्ति जताई है। यह प्रस्ताव किसी विशेष क्षेत्र या उप क्षेत्र के भीतर रक्षा क्षमताओं में संतुलन बनाए रखने की वकालत करता है। इस प्रस्ताव की आलोचना करते हुए, अनमोल शेर बेदी ने कहा कि यह दृष्टिकोण एक गलत धारणा पर आधारित है कि किसी देश की सुरक्षा चिंताएं उसकी अपनी सीमाओं पर खत्म हो जाती हैं, जबकि असल में ऐसा बिल्कुल नहीं है।
Updated on:
3 Nov 2026, 1:11 PM IST
Published on:
3 Nov 2026, 12:29 PM IST
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