3 नवंबर 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

भारत से व्यापार बंद होने पर पाकिस्तान को हुआ 40 बिलियन डॉलर का नुकसान, PIBC ने फिर से ट्रेड शुरू करने की लगाई गुहार

Pakistan economic loss: पाक-भारत बिजनेस काउंसिल के चेयरमैन नूर मोहम्मद कासूरी ने दावा किया है कि 2019 में भारत के साथ व्यापार बंद होने के बाद पाकिस्तान को करीब 40 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ। उन्होंने दोनों देशों से व्यापार बहाल करने की अपील की।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भारत

•

image

Anand Shekhar

•

Updated: 3 Nov 2026, 7:43 AM IST

India-Pak Trade

भारत से व्यापार बंद होने पर पाकिस्तान को 40 अरब डॉलर का नुकसान (फोटो- ANI)

India-Pak Trade: 2019 के पुलवामा आतंकी हमले और उसके बाद भारत सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के कारण भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया था। इस वजह से दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध निलंबित हो गए, जिसका पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर पड़ा है। पाक-भारत बिजनेस काउंसिल के चेयरमैन नूर मुहम्मद कसूरी ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में व्यापार बंद रहने के कारण पाकिस्तान को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 40 अरब डॉलर (3.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक) का आर्थिक नुकसान हुआ है। कसूरी ने दोनों पड़ोसी देशों से आग्रह किया है कि वे जल्द से जल्द अपने व्यापारिक संबंधों को फिर से बहाल करें।

दूर के देशों से आयात करने पर लागत और माल ढुलाई का खर्च बढ़ा

नूर मुहम्मद कसूरी ने बताया कि भारत के साथ सीमा-पार व्यापार बंद होने के बाद, पाकिस्तानी उद्योगों को जरूरी कच्चा माल और अन्य सामान दूर के विदेशी बाजारों से मंगाना पड़ा। इससे न केवल माल ढुलाई और परिवहन लागत में भारी बढ़ोतरी हुई, बल्कि सामान पहुंचने में भी काफी देरी हुई। इसका सीधा असर पाकिस्तान की घरेलू उत्पादन क्षमता और तैयार माल की लागत पर पड़ा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाकिस्तानी उत्पाद प्रतिस्पर्धा करने लायक नहीं रह गए हैं।

फार्मास्यूटिकल्स को 2-3 अरब डॉलर और टेक्सटाइल को 5 अरब डॉलर का फटका

पाकिस्तानी उद्योगों पर पड़े असर के बारे में बताते हुए कसूरी ने कहा कि पाकिस्तान का फार्मास्युटिकल उद्योग, जरूरी एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (API) और कच्चे माल के लिए काफी हद तक भारत पर निर्भर था। अगर भारत से सीधी आपूर्ति फिर से शुरू हो जाए, तो पाकिस्तान के फार्मास्युटिकल उद्योग को हर साल 2 से 3 अरब डॉलर की बचत हो सकती है।

उन्होंने आगे बताया कि देश में कपास की पैदावार कम होने और उसकी गुणवत्ता खराब होने के कारण, पाकिस्तान की टेक्सटाइल मिलों को ब्राजील, मिस्र, चीन और अमेरिका से कपास आयात करना पड़ा। नतीजतन, टेक्सटाइल उद्योग को लगभग 5 अरब डॉलर का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा है।

चीनी, उर्वरक, सीमेंट और पेट्रोलियम के लिए चुकानी पड़ रही है भारी कीमत

कसूरी ने कहा कि भारत कृषि और मैन्युफैक्चरिंग का एक प्रमुख वैश्विक केंद्र है। इसके बावजूद पाकिस्तान चीनी, उर्वरक, सीमेंट, पेट्रोलियम उत्पाद, लोहा और स्टील, सब्जियां और भारी मशीनरी जैसी चीजें दूर-दराज के देशों से आयात करता है। ऊर्जा क्षेत्र का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि भौगोलिक दृष्टि से भारतीय तेल रिफाइनरियां पाकिस्तान के सबसे करीब हैं। यदि पाकिस्तान भारत से पेट्रोलियम उत्पादों का आयात शुरू करता है, तो उसे कम लागत पर आसानी से और समय पर ईंधन मिल सकता है।

श्रीलंका का दिया उदाहरण

कसूरी ने कहा कि पाकिस्तान के पारंपरिक कपास उत्पादक क्षेत्रों में किसान अब गन्ने की खेती की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे कपड़ा उद्योग का संकट और गहरा गया है। क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने श्रीलंका के आर्थिक संकट के दौरान भारत द्वारा दी गई वित्तीय और मानवीय सहायता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संकट के समय पड़ोसी देश एक-दूसरे के लिए मददगार साबित हो सकते हैं।

फिर से ट्रेड शुरू करने की अपील

कसूरी ने दोनों देशों के नीति-निर्माताओं से आग्रह किया कि वे राजनीतिक मतभेदों को आर्थिक संभावनाओं के रास्ते में बाधा न बनने दें। उन्होंने बातचीत के जरिए सभी लंबित मुद्दों को सुलझाने का आह्वान किया और साथ ही व्यापार, निवेश और धार्मिक पर्यटन को तुरंत बहाल करने की वकालत की।