
विदेश मंत्री एस. जयशंकर(फोटो-IANS)
S Jaishankar: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को प्रस्तावित भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते को बड़ी संभावनाओं वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता दुनिया के सबसे बड़े और आकर्षक बाजारों में से एक में भारत की बाजार पहुंच बढ़ाकर देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा पहुंचा सकता है। जयशंकर नई दिल्ली में आयोजित कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में 'India and the World: Adaptive by Design' विषय पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था में मौजूद सभी समस्याओं के लिए अमेरिका को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। कई तरह के बाजार असंतुलन और विकृतियां अन्य स्रोतों से भी पैदा हुई हैं, जिनका निष्पक्ष तरीके से आकलन किए जाने की जरूरत है।
विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका भारत का प्रमुख आर्थिक, व्यापारिक और रक्षा साझेदार है। उन्होंने हाल में यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और यूरोपीय फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) के साथ हुए व्यापार समझौतों का भी जिक्र किया। जयशंकर के मुताबिक, इन समझौतों से भारत के व्यापारिक संबंधों में ज्यादा संतुलन लाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि भारत के पहले के कई मुक्त व्यापार समझौते मुख्य रूप से आसियान देशों, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब भारत के लिए ऐसे देशों और अर्थव्यवस्थाओं के साथ अपने व्यापारिक संबंध बढ़ाना महत्वपूर्ण है, जहां बाजार ज्यादा पारदर्शी और परिपक्व हैं और खरीदारी की क्षमता भी अधिक है।
जयशंकर ने भारत की विदेश नीति में 'मल्टी-अलाइनमेंट' के दृष्टिकोण को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत ने चीन, रूस और खाड़ी देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत या बेहतर किया है। उन्होंने कहा कि भारत अलग-अलग देशों के साथ रिश्तों को उनके सामने मौजूद अवसरों और चुनौतियों के आधार पर आगे बढ़ाता है। उनके मुताबिक, हर संबंध भारत के लिए कुल मिलाकर लाभकारी है और एक साझेदार के साथ हुई प्रगति दूसरे मोर्चों पर भारत के हितों को आगे बढ़ाने में भी मदद कर सकती है।
रूस-यूक्रेन संघर्ष का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि भारत नागरिक जहाजों पर होने वाले हमलों को पूरी तरह अस्वीकार्य मानता है। उन्होंने कहा कि चाहे मामला ब्लैक सी, रेड सी या खाड़ी का हो, नागरिक शिपिंग को निशाना बनाया जाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। जयशंकर ने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष का समाधान निकालने का रास्ता बातचीत और कूटनीति से होकर जाता है।
Updated on:
05 Oct 2026 09:47 pm
Published on:
05 Oct 2026 09:38 pm
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