
Jairam Ramesh ने मतदाता सूची और EC की भूमिका पर साधा निशाना (फोटो-ANI)
Jairam Ramesh SIR: देश में मतदाता सूची को लेकर चल रही बहस ने अब नया मोड़ ले लिया है। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओ.पी. रावत ने SIR से जुड़े घटनाक्रम और निर्वाचन आयोग के भीतर सामने आई असहमति को गंभीर बताया है। इसी बीच कांग्रेस महासचिव Jairam Ramesh ने अपने X पोस्ट के जरिए चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता, मतदाता नामों में बदलाव और आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनके बयान ने उस बहस को फिर तेज कर दिया है, जिसमें तकनीक, पारदर्शिता और मतदाता अधिकार तीनों केंद्र में हैं।
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर निर्वाचन आयोग और विपक्ष के बीच चल रही खींचतान अब और तीखी हो गई है। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओ.पी. रावत ने हालिया घटनाक्रम पर चिंता जताते हुए कहा है कि आयोग के भीतर इस तरह की असहमति बेहद गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति को दर्शाती है। रावत ने विशेष तौर पर Form 6 में किए गए बदलावों पर सवाल उठाते हुए उन्हें नियमों के लिहाज से गलत बताया।
Rawat के मुताबिक निर्वाचन आयोग एक बहुसदस्यीय संस्था है और बड़े फैसलों में सामूहिक निर्णय प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। यह टिप्पणी ऐसे समय आई जब The Indian Express की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि दो निर्वाचन आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में कई फैसलों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट के अनुसार, ये आपत्तियां SIR, मतदाता नाम जोड़ने-हटाने, Form 6 और चुनावी डेटाबेस से जुड़े मुद्दों पर थीं।
इसी विवाद के बीच कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने अपने X पोस्ट के जरिए निर्वाचन आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि SIR के तीन चरणों में करीब 14 करोड़ नाम हटाए गए और अब संबंधित मतदाताओं को दोबारा नाम जुड़वाने के लिए निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों के पास जाना पड़ रहा है। यह आंकड़ा जयराम रमेश और कांग्रेस की ओर से दिया गया दावा है, जिसे आयोग की अंतिम मतदाता सूची के आंकड़े के रूप में नहीं पेश किया जाना चाहिए।
जयराम रमेश ने ECINet की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि डिजिटल सिस्टम के जरिए मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में स्थानीय निर्वाचन अधिकारियों के अधिकार प्रभावित हुए। उन्होंने Form 6 में बदलाव और कथित AI के इस्तेमाल को लेकर भी पारदर्शिता की मांग की है।
दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने कहा है कि SIR से जुड़े फैसले तीनों आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे। आयोग ने प्रभावित मतदाताओं के लिए बूथ लेवल अधिकारियों के जरिए घर-घर जाकर दस्तावेज जुटाने और जरूरत पड़ने पर मतदाता पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही है। ECINet की कार्यप्रणाली और संबंधित नियमों के अनुपालन की समीक्षा के लिए समिति बनाए जाने की भी जानकारी दी गई है।
इस पूरे विवाद का अगला अहम पड़ाव यह होगा कि अंतिम मतदाता सूचियों में कितने नाम बहाल होते हैं और SIR से जुड़े तकनीकी तथा कानूनी सवालों पर निर्वाचन आयोग कितना विस्तृत स्पष्टीकरण देता है। फिलहाल Rawat की टिप्पणियों और जयराम रमेश के X पोस्ट ने मतदाता सूची की शुद्धता से लेकर चुनाव आयोग की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया तक कई सवालों को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है।
Updated on:
01 Oct 2026 10:16 am
Published on:
01 Oct 2026 10:01 am
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