
Ajinkya Shinde : जेल जाने से नहीं डरेंगे! अशुतोष और सौरव दास के मामले में अजिंक्य शिंदे का बड़ा बयान (फोटो सोर्स: ANI)
Ajinkya Shinde Statement: नई दिल्ली में जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराने और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाने के मामले ने राजनीतिक बहस को नया मोड़ दे दिया है। सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) से जुड़े नेता अजिंक्य शिंदे ने दावा किया है कि संगठन के दो कार्यकर्ताओं, सौरव दास और अशुतोष, को पांच दिन के लिए जेल भेजा गया है। शिंदे ने इसे नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जुड़ा सवाल बताते हुए सरकार की कार्रवाई पर गंभीर आपत्ति जताई है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए इस घटनाक्रम के केंद्र में प्रदर्शन स्थल पर प्रवेश और विरोध जताने का अधिकार है। CJP के नेता अशुतोष रांका और सौरव दास को प्रतिबंधित प्रदर्शन स्थल में कथित तौर पर बिना अनुमति प्रवेश करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। बुधवार को दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेजे जाने की खबर सामने आई।
CJP नेता अजिंक्य शिंदे ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उनकी टीम जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज लेकर पहुंची थी और उसने ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए थे। शिंदे के मुताबिक, इस तरह के कदम के लिए कार्यकर्ताओं को जेल भेजना नागरिक स्वतंत्रता से जुड़े सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी शक्तियों का इस्तेमाल असहमति की आवाज दबाने के लिए कर रही है।
शिंदे ने अपने बयान में अशुतोष के जन्मदिन का विशेष उल्लेख किया। उनका कहना था कि जिस दिन अशुतोष का जन्मदिन था, उसी दिन उन्हें जेल भेजे जाने की कार्रवाई हुई। उन्होंने कहा कि जेल जाने से संगठन के नेताओं का मनोबल टूटने के बजाय उनका संकल्प और मजबूत हुआ है।
शिंदे ने यह भी दावा किया कि पांच दिन की हिरासत से कार्यकर्ता डरने वाले नहीं हैं। उनके अनुसार, दोनों नेताओं ने आत्मविश्वास के साथ जेल जाने की बात कही और अपने रुख से पीछे हटने के संकेत नहीं दिए।
जंतर-मंतर हमेशा से राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और तमाम मुद्दों पर विरोध दर्ज कराने वालों के लिए खास जगह रहा है। बहुत से लोग यहीं आकर अपनी बात कहते हैं, लेकिन ये जगह पूरी तरह खुली नहीं है यहां प्रदर्शन करना नियम और प्रशासनिक इजाजत पर टिका है। दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को पहले ही तय 'प्रदर्शन स्थलों' की लिस्ट से हटा दिया था। इसी माहौल में CJP के कार्यकर्ताओं के पहुंचने और पुलिस की कार्रवाई की खबर आई।
अब मामला दो हिस्सों में बंट गया है एक तरफ प्रशासन के नियम, दूसरी तरफ विरोध और बोलने की आज़ादी। किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले पुलिस क्या कहती है, कानून क्या कहता है और अदालत क्या फैसले देती है, ये सब देखना ज़रूरी है।
इस पूरे मामले ने दिल्ली में विरोध की आजादी और सरकारी कंट्रोल वाली बहस को फिर से जिंदा कर दिया है। CJP के नेता साफ कह रहे हैं कि वो सरकार के खिलाफ बोलते रहेंगे। आगे की कानूनी कार्रवाई से ही साफ होगा कि मामला किस तरफ जाएगा। अभी तो साफ है कि ये बहस थमेगी नहीं।
Updated on:
14 Oct 2026 10:19 am
Published on:
14 Oct 2026 09:45 am
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
