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झारखंड में JSSC-CGL परीक्षा रद्द होने के बाद नया बवाल, हाथ में आई नौकरी गंवाने वालों ने अब सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

JSSC-CGL परीक्षा रद्द होते ही नौकरी पा चुके अभ्यर्थी रांची में धरने पर बैठे। अभ्यर्थियों ने कहा- जांच करो, दोषियों को सजा दो, निर्दोषों की नौकरी मत छीनो।
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JSSC CGL Cancelled, JSSC CGL Protest

झारखंड में अब 2014 के बाद नियुक्त JSSC-CGL कर्मचारी धरने पर बैठे (फोटो सोर्स- ANI)

Student Protest: एक तरफ नौकरी पाने का जश्न और दूसरी तरफ अचानक सरकार का एक आदेश… और पूरी जिंदगी पलक झपकते ही बदल गई। झारखंड सरकार द्वारा JSSC-CGL परीक्षा रद्द किए जाने के बाद अब राज्य में नया बवाल खड़ा हो गया है। जो युवा कल तक सरकारी दफ्तरों में बैठकर ईमानदारी से अपनी सेवाएं दे रहे थे, वे आज रांची के प्रोजेक्ट भवन के बाहर फर्श पर बैठकर रो रहे हैं। सरकार के इस फैसले के विरोध में चयनित अभ्यर्थी अब सड़कों पर उतर आए हैं और एक ही सवाल पूछ रहे हैं, 'जब हमने मेहनत से परीक्षा पास की, तो हमारी नौकरी क्यों छीनी जा रही है।'

'दोषियों पर एक्शन हो, हमारी नौकरी क्यों छीनी?'

प्रोजेक्ट भवन के बाहर जमा हुए अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने किसी भी गलत तरीके से नहीं, बल्कि अपनी दिन-रात की मेहनत और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया के जरिए यह नौकरी हासिल की थी। पदों पर कार्यरत कर्मचारियों का कहना है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर धांधली या अनियमितता हुई है, तो उसकी केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए।
प्रदर्शन कर रहे एक अभ्यर्थी ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि हमने ईमानदारी से परीक्षा पास की और अपने पदों पर सेवा दे रहे थे। अगर किसी ने गड़बड़ी की है तो उस पर कार्रवाई हो, पूरे परीक्षा परिणाम को रद्द कर सभी के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना कहां का न्याय है।

'माता-पिता धैर्य रखें, दोबारा जीतेंगे'

धरने पर बैठे युवाओं ने सरकार के इस फैसले को अदालत के आदेशों के विपरीत बताया है। एक अन्य प्रदर्शनकारी ने भावुक होते हुए कहा कि सरकार के एक फैसले ने उन्हें फिर से सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है। उन्होंने अपने परिजनों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि वे हिम्मत न हारें, अपने हक की लड़ाई को वे कानूनी और शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखेंगे और दोबारा जीत हासिल करेंगे।

CM हेमंत सोरेन का फैसला और आउटसोर्स एजेंसी पर गाज

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार शाम को JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने का ऐलान किया था। इसके साथ ही सरकार ने साल 2014 से आउटसोर्स एजेंसी TDPL के जरिए कराई गई सभी भर्ती परीक्षाओं को भी निरस्त करने का आदेश दिया है। बता दें कि छात्र काफी समय से परीक्षाओं में धांधली का आरोप लगाकर जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे थे।

निर्दोष अभ्यर्थियों के भविष्य पर मंडराया संकट

सरकार के इस निर्णय के बाद अब सबसे बड़ा सवाल उन अभ्यर्थियों पर खड़ा हो चुका है जो नौकरी में आ चुके थे। अभ्यर्थियों की मांग है कि सरकार स्थिति जल्द से जल्द स्पष्ट करे। उनका कहना है कि दोषियों को सजा देने के बजाय पूरी परीक्षा रद्द करने से केवल निर्दोष और मेधावी युवाओं को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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