
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू (फाइल फोटो)
Kiren Rijiju: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण के दौरान दिए गए 'दिमागी नक्सल' वाले बयान पर देश में सियासत तेज हो गई है। विपक्ष के बयानों के बाद अब सरकार की तरफ से संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मोर्चा संभाला है। रिजिजू ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के एक पुराने बयान का जिक्र करते हुए कांग्रेस पार्टी पर सीधा हमला बोला है।
रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह का एक पुराना वीडियो और बयान शेयर किया। इसमें मनमोहन सिंह ने नक्सलवाद को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया था। इस संदर्भ को रखते हुए रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस को अपने ही पूर्व प्रधानमंत्री के विचारों को नजरअंदाज करने और इस मुद्दे पर राजनीति करने के लिए मनमोहन सिंह के परिवार से माफी मांगनी चाहिए।
लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी ने कहा था कि देश ने जंगलों में हथियार उठाने वाले नक्सलियों पर तो काफी हद तक काबू पा लिया है, लेकिन अब 'दिमागी नक्सल' से सतर्क रहने की जरूरत है। पीएम के अनुसार, यह सोच समाज और संस्थानों को भीतर से कमजोर करने का काम करती है। उन्होंने युवाओं से अपील की है कि हमें ऐसे लोगों को पहचानने और उन्हें अलग करने की जरूरत है।
कांग्रेस ने पीएम मोदी की इस टिप्पणी को सिरे से खारिज कर दिया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसे सिर्फ एक राजनीतिक बयानबाजी करार दिया। उन्होंने कहा कि पहले 'अर्बन नक्सल' शब्द का इस्तेमाल किया जाता था और जब संसद में इसकी परिभाषा पूछी गई, तो सरकार के पास कोई जवाब नहीं था। अब उसी तरह 'दिमागी नक्सल' जैसे नए शब्द गढ़कर राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाया जा रहा है।
पीएम मोदी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सीजेपी के सह-संयोजक सौरव दास ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा कि सवाल पूछने वाले पढ़े-लिखे युवाओं को 'दिमागी नक्सल' कहना पूरी तरह गलत है। सौरव दास के मुताबिक, युवाओं को ऐसे नामों से संबोधित करना सरकार के अहंकार और उनकी समस्याओं को सुलझाने में नाकामी को दर्शाता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अब देश का युवा जागरूक हो चुका है और बदलाव की घंटी बज चुकी है।
Updated on:
17 Aug 2026 06:25 pm
Published on:
17 Aug 2026 06:17 pm
