
कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ मच गई (Photo-IANS)
Kolkata Durga Puja Stampede: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पंडाल में भगदड़ मचने से 19 लोगों की मौत और 25 लोग घायल हो गए थे। इसके बाद अब प्रशासन अलर्ट हो गया है। घटना के बाद दुर्गा पूजा पंडालों में सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को लेकर नए दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। करीब 400 पूजा आयोजन समितियों के संगठन फोरम फॉर दुर्गोत्सव और पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कई अहम कदम उठाने का फैसला किया है।
फोरम फॉर दुर्गोत्सव ने सभी पूजा आयोजकों को प्रत्येक पंडाल में कम से कम 10 रेनकोट और वॉकी-टॉकी रखने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ पंडालों के अंदर नियमित रूप से सार्वजनिक उद्घोषणा करने को कहा गया है। आयोजकों को लोगों से सेल्फी लेने और वीडियो बनाने से बचने की अपील करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि भीड़ एक जगह जमा न हो।
संगठन ने प्रत्येक जोन में कम से कम एक एंबुलेंस तैनात रखने को भी कहा है। इसका उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति में घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है।
वहीं दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ की घटना के बाद सीएम शुभेन्दु अधिकारी ने भी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर पंडालों में आने वाली भीड़ को सीमित किया जाएगा। वीआईपी लोगों के लिए अलग कतार की व्यवस्था नहीं होगी और सुरक्षा के लिए जरूरी सभी कदम उठाए जाएंगे।
प्रमुख दुर्गा पूजा पंडालों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए अग्निशमन विभाग और पुलिस अधिकारियों की एक समिति भी बनाई गई है। यह समिति मौके पर जाकर सुरक्षा इंतजामों का निरीक्षण करेगी और जरूरत पड़ने पर तत्काल सुधार के सुझाव देगी।
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने थाना प्रभारियों और सहायक पुलिस आयुक्तों को अधिक भीड़ वाले प्रमुख पंडालों का दौरा करने के निर्देश दिए हैं। एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, सभी प्रवेश और निकास मार्गों को बाधामुक्त रखना अनिवार्य किया गया है।
नए निर्देशों के तहत बारिश होने पर लोगों को पंडाल के भीतर शरण लेने के लिए प्रवेश नहीं दिया जाएगा। पंडाल के अंदर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करनी होगी। इसके अलावा, किसी भी वीआईपी वाहन को पंडाल के नजदीक जाने की अनुमति नहीं होगी।
पुलिस सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली के जरिए आयोजकों की ओर से की जाने वाली घोषणाओं की भी निगरानी करेगी। अधिकारियों का मानना है कि लोग पंडालों में धीरे-धीरे चलते हैं और सजावट व प्रतिमाओं के वीडियो बनाने तथा सेल्फी लेने के लिए रुक जाते हैं। इससे भीड़ जमा होती है और भगदड़ का खतरा बढ़ जाता है।
Updated on:
19 Oct 2026 05:34 pm
Published on:
19 Oct 2026 05:09 pm
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