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AIADMK से TVK में गए विधायकों के इस्तीफे पर मद्रास हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, स्पीकर को 2 महीने में अयोग्यता पर निर्णय का निर्देश

AIADMK Resignation Case: मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर के AIADMK के छह विधायकों के इस्तीफे स्वीकार करने के फैसले को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि इस्तीफे स्वीकार होने से दल-बदल के आधार पर अयोग्यता की कार्यवाही खत्म नहीं होती। स्पीकर को यह कार्यवाही दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी।
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Madras High Court

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Madras High Court Verdict:मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु विधानसभा स्पीकर के उस फैसले को सही ठहराया है, जिसमें उन्होंने AIADMK छोड़कर अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) में शामिल होने वाले विधायकों के इस्तीफे स्वीकार किए थे। चीफ जस्टिस एस.ए. धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की बेंच ने माना कि विधायकों के इस्तीफे वास्तविक थे और स्पीकर से इस्तीफ़े की प्रक्रिया की विस्तृत जांच करने की उम्मीद नहीं की जा सकती थी। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि विधानसभा से किसी सदस्य के इस्तीफे का मतलब यह नहीं है कि उनके खिलाफ चल रही अयोग्यता की कार्यवाही अपने आप खत्म हो जाएगी। कोर्ट ने स्पीकर को निर्देश दिया कि वे इन पूर्व विधायकों के खिलाफ लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर अगले दो महीनों के भीतर अंतिम आदेश जारी करें।

इस्तीफे की विस्तृत जांच अनिवार्य नहीं

कोर्ट ने माना कि विधायकों के इस्तीफे असली और स्वेच्छा से दिए गए थे, इसलिए विधानसभा स्पीकर से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे इस्तीफे के पीछे के राजनीतिक कारणों या मंशा की विस्तृत जांच करें। स्पीकर की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट सी.एस. वैद्यनाथन ने तर्क दिया कि संविधान के अनुच्छेद 190(3)(b) के तहत, स्पीकर का दायित्व केवल यह देखना है कि इस्तीफा असली है और बिना किसी दबाव के दिया गया है, न कि इसके पीछे के राजनीतिक कारणों की जांच करना।

वहीं, इस्तीफा देने वाले विधायकों का प्रतिनिधित्व कर रही वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने तर्क दिया कि सीट खाली करना हमेशा भ्रष्टाचार या कदाचार का परिणाम नहीं होता, बल्कि यह लोकतंत्र और असहमति का संवैधानिक अधिकार है कि कोई सदस्य अपनी पार्टी से अलग होकर इस्तीफा दे सके।

क्या है पूरा मामला

पूरा विवाद मई 2026 में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के नतीजों से शुरू हुआ। 4 मई को घोषित नतीजों में विजय की पार्टी TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन उसे केवल 108 सीटें मिलीं, जो बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटों से कम थीं। इसके बाद, 13 मई को हुए विश्वास मत के दौरान AIADMK ने अपने सदस्यों को प्रस्ताव के खिलाफ वोट करने के लिए व्हिप जारी किया। इसके बावजूद, 25 विधायकों ने पार्टी के व्हिप की अवहेलना की और TVK के पक्ष में वोट किया, जिससे पार्टी की कुल संख्या 144 वोट हो गई।

इस क्रॉस-वोटिंग के बाद AIADMK ने 14 मई को मांग की कि दलबदल विरोधी कानून के तहत इन विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही शुरू की जाए। इसके बाद, 25 मई को संबंधित विधायकों ने दोपहर 2:30 बजे स्पीकर को औपचारिक रूप से अपने इस्तीफे सौंपे और उसी दिन पार्टी में शामिल होने के लिए TVK महासचिव से मुलाकात की। स्पीकर ने उसी दिन इस्तीफे स्वीकार कर लिए और आधिकारिक गजट में अधिसूचना जारी कर दी।

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