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नंदीग्राम उपचुनाव: कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत में दखल से किया इनकार

Supreme Court On Milan Pradhan: सुप्रीम कोर्ट ने नंदीग्राम उपचुनाव में मिलन प्रधान की अंतरिम जमानत में दखल से इनकार कर दिया। 9 अक्टूबर को मतगणना होगी और 21 अक्टूबर को उन्हें सरेंडर करना होगा।
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भारत

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Mukul Kumar

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Oct 07, 2026

Supreme Court Milan Pradhan, Nandigram Bypoll,

कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान (Photo: ANI/Enhanced via ChatGPT)

Nandigram election result: पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव से जुड़े मामले में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है।

सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसमें प्रधान को 20 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत दी गई थी। यह जमानत उन्हें चुनाव लड़ने और मतगणना में शामिल होने के लिए दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि फिलहाल वह हाईकोर्ट के फैसले को बदलने या रोकने की कोई वजह नहीं देखता। कोर्ट ने यह भी कहा कि चुनाव में मतदान हो चुका है और अब 9 अक्टूबर को वोटों की गिनती होनी है। प्रधान को 21 अक्टूबर को सरेंडर करना होगा।

9 अक्टूबर को होगी मतगणना

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखा। कोर्ट ने कहा कि 9 अक्टूबर को परिणाम के लिए वोटों की गिनती की जाएगी। ऐसे में प्रधान को मतगणना में शामिल होने की अनुमति देने के लिए हाईकोर्ट ने जो अंतरिम जमानत दी थी, उसमें दखल देना उचित नहीं होगा।

हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक, प्रधान को 20 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत मिली है। उन्हें इसके अगले दिन यानी 21 अक्टूबर को संबंधित अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करना होगा।

गंभीर धाराओं में दर्ज हैं मामले

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि मिलन प्रधान के खिलाफ दर्ज मामलों में कुछ गंभीर अपराधों से जुड़ी धाराएं हैं। हालांकि, पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने उन्हें स्थायी राहत के तौर पर जमानत नहीं दी थी।

अदालत के मुताबिक अंतरिम जमानत देने का मुख्य मकसद प्रधान को चुनाव लड़ने और मतगणना की प्रक्रिया में हिस्सा लेने का मौका देना था। इसी सीमित उद्देश्य को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप नहीं किया।

नियमित जमानत की मांग पर सरकार की दलीलें रहेंगी कायम

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अगर मिलन प्रधान आगे चलकर अंतरिम जमानत बढ़ाने या उसे नियमित जमानत में बदलने की मांग करते हैं, तो पश्चिम बंगाल सरकार अपनी सभी दलीलें अदालत के सामने रख सकती है।

इसका मतलब है कि मौजूदा आदेश को भविष्य की नियमित जमानत की मंजूरी के तौर पर नहीं देखा जाएगा। आगे की सुनवाई में राज्य सरकार मामले से जुड़े सभी तथ्यों और आरोपों के आधार पर अपना पक्ष रखने के लिए स्वतंत्र होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने मेरिट पर नहीं दी कोई राय

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है। यानी अदालत ने यह फैसला नहीं किया है कि मिलन प्रधान के खिलाफ लगाए गए आरोप सही हैं या गलत।

नंदीग्राम उपचुनाव का परिणाम आने के बाद मिलन प्रधान की आगे की कानूनी स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि वह जमानत को आगे बढ़ाने या नियमित जमानत में बदलने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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