
भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी (फोटो - IANS)
Murli Manohar Joshi: बीजेपी के सीनियर नेता और पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन और उसके बाद उन पर हुई पुलिस कार्रवाई को अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि छात्रों के मुद्दों को सहानुभूतिपूर्ण बातचीत से ही सुलझाया जा सकता है, न कि लाठीचार्ज करके। इस दौरान उन्होंने चुनाव आयोग से जुड़े विवाद और नई शिक्षा नीति (NEP) पर भी प्रतिक्रिया दी।
छात्रों के विरोध प्रदर्शन और उन पर हुए लाठीचार्ज के मुद्दे पर डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि आंदोलनों की बात अलग है। छात्रों की जो भी जायज मांगें हों, उन्हें हमेशा सुना जाना चाहिए और पूरी सहानुभूति के साथ सुना जाना चाहिए। लाठीचार्ज करने का जो तरीका है, वो बिल्कुल गलत है। इस रास्ते से किसी समस्या का समाधान कभी नहीं निकल सकता। अगर कोई मुश्किल या मुद्दा है, तो बैठकर उनकी बात सुनें। आखिरकार, वे हमारे अपने बच्चे ही तो हैं।
मुरली मनोहर जोशी ने उदाहरण देते हुए कहा, "मान लीजिए बच्चे ने कहा, 'पिताजी, आपने कहा था कि इस बार अच्छा कोट दिलाएंगे।' इस पर पिता ने कहा, 'बेटे, इस बार पैसे नहीं थे इसलिए नहीं दिला पाए, अगली बार दिला देंगे।' तो आप भी छात्रों को बताइए ना कि क्या दिक्कत थी, किस वजह से काम नहीं हो पाया और आगे कब होगा। लेकिन सीधे यह कह देना कि बस अब हो गया, यह कोई ठीक तरीका नहीं है।"
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के कामकाज को लेकर विपक्ष की आपत्तियों पर बात करते हुए डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने कहा, "अब्राहम लिंकन ने लगभग 200 साल पहले कहा था कि जनता की, जनता द्वारा और जनता के लिए बनी सरकार कभी खत्म नहीं होगी। आज मैं कहता हूं कि जनता की सरकार तभी बनी रहेगी जब चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष हों, सरकारें जवाबदेह हों, नौकरशाही पारदर्शी हो और विपक्ष संवेदनशील व जिम्मेदार हो। यह पूरी प्रक्रिया संविधान के दायरे में होनी चाहिए, और अगर संविधान का उल्लंघन होता है, तो सुप्रीम कोर्ट को उस पर संज्ञान लेना चाहिए। यही वह सिद्धांत है जिस पर हमारे लोकतंत्र को काम करना चाहिए।"
देश में लागू नई शिक्षा नीति (NEP) को लेकर डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण विषय है जिस पर सावधानीपूर्वक विचार करने की आवश्यकता है। जहां तक NEP की बात है, इसे लागू हुए अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है, यह अभी शुरुआती और रोलआउट के चरण में है। इसलिए इस चरण में इसके बारे में कोई पक्की बात कैसे कही जा सकती है? पुरानी शिक्षा नीति 20, 25 या 30 वर्षों तक लागू रही, जिससे उस पर खुली चर्चा हो सकी। नई नीति को लागू हुए अभी केवल दो से चार साल ही हुए हैं। भारत एक विशाल देश है। इसलिए इसके वास्तविक परिणाम समय के साथ ही सामने आएंगे। हमने पुरानी नीति को देखा। उसमें कुछ कमियां थीं, इसीलिए यह नई नीति लाई गई। अब देखना होगा कि यह कैसे काम करती है।
Updated on:
08 Oct 2026 01:41 pm
Published on:
08 Oct 2026 01:41 pm
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