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Nobel Prize 2026: आज से शुरू होगा दुनिया के सबसे बड़े सम्मान का ऐलान, जानिए क्यों है इतनी खास इसकी कहानी

Nobel Prize India: एक आविष्कार से मिली दौलत ने आगे चलकर मानवता के लिए दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों की नींव रखी। लेकिन नोबेल तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं इसके पीछे वर्षों की गुप्त नामांकन प्रक्रिया और विशेषज्ञों की कड़ी पड़ताल होती है।
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भारत

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Manoj Vashisth

•

Oct 05, 2026

Nobel Prize 2026

Nobel Prize 2026: आज से शुरू नोबेल पुरस्कारों का ऐलान, जानिए 125 साल पुराने सम्मान की पूरी कहानी @NobelPrize

Nobel Prize Announcement: दुनिया को बदल देने वाली खोजों, विचारों और प्रयासों को सम्मानित करने वाला नोबेल पुरस्कार सोमवार से शुरू होने जा रहा है। 5 से 12 अक्टूबर के बीच स्वीडन और नॉर्वे में छह श्रेणियों के विजेताओं के नाम घोषित होंगे। दुनिया भर के लोग इन घोषणाओं को नोबेल पुरस्कार के आधिकारिक डिजिटल माध्यमों पर लाइव देख सकेंगे। इस साल सभी श्रेणियों में नोबेल पुरस्कार के लिए 287 नामांकन हुए हैं। लगभग 125 सालों से दिए जा रहे यह दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार हैं। जानते हैं इन पुरस्कारों की पूरी कहानी।

Nobel Prize 2026: कब से शुरू हुई परंपरा?

नोबेल पुरस्कारों की शुरुआत प्रसिद्ध स्वीडिश आविष्कारक अल्फ्रेड नोबेल के नाम से हुई है।
अल्फ्रेड नोबेल ने ही डायनामाइट का आविष्कार किया था। उनके नाम पर 355 पेटेंट हैं। उन्होंने अपनी 1895 की वसीयत में इन पुरस्कारों की नींव रखी थी। उनकी मृत्यु के पांच साल बाद 1901 में पहली बार नोबेल पुरस्कार दिए गए। पुरस्कारों की आर्थिक नींव और स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए 1900 में नोबेल फाउंडेशन की स्थापना हुई।

पुरस्कार पाने वाले को क्या मिलता है ?

नोबेल पुरस्कार भौतिक विज्ञान, रसायन, आर्थिक विज्ञान,शांति, साहित्य और मेडिसिन के क्षेत्र में मानवजाति के लिए कल्याणकारी कार्य करने के लिए मिलता है। पहले पांच ही क्षेत्रों में यह पुरस्कार दिया जाता था। 1968 में आर्थिक विज्ञान में भी यह पुरस्कार दिया जाने लगा। नोबेल पुरस्कार पाने वाली शख्सियत को 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोनर (11.49 करोड़ रुपए) की पुरस्कार राशि मिलती है। नकद पुरस्कार के अलावा, नोबेल पुरस्कार विजेता को एक स्वर्ण पदक और एक डिप्लोमा भी मिलता है।

नामांकन की क्या है प्रक्रिया?

इन पुरस्कारों के लिए कोई भी व्यक्ति स्वयं को नामांकित नहीं कर सकता। प्रतिवर्ष नोबेल समितियां दुनियाभर के हजारों विशेषज्ञों, प्रोफेसरों, वैज्ञानिकों और पिछले विजेताओं को गुप्त नामांकन फॉर्म भेजती हैं। नामांकन फॉर्म भेजने की आखिरी तारीख 31 जनवरी होती है। प्राप्त हुए नामों में से समितियां एक सूची तैयार करती हैं। विशेषज्ञ इन नामों की गहन समीक्षा व मूल्यांकन करते हैं। अक्टूबर की शुरुआत में विभिन्न नोबेल संस्थान अंतिम रूप से विजेताओं के नामों पर मतदान करते हैं। बहुमत के आधार पर विजेता तय होते हैं। इसी माह विजेताओं की घोषणा की जाती है।

कितने भारतीयों को मिला नोबेल पुरस्कार?

1913 से 2019 तक 10 भारतीयों/भारत से जुड़ी हस्तियों को साहित्य, विज्ञान, शांति और अर्थशास्त्र जैसे अलग-अलग क्षेत्रों के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मान किया गया। इनमें से प्रमुख रूप से रवीन्द्रनाथ टैगोर को साहित्य के लिए, सी. वी. रमन को भौतिक विज्ञान के लिए, मदर टेरेसा और दलाईलामा को शांति के लिए, अमर्त्य सेन और अभिजीत बनर्जी को आर्थिक विज्ञान के लिए, कैलाश सत्यार्थी को शांति के लिए नोबेल पुरस्कार मिल चुके हैं।

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