
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी । फाइल फोटो- पत्रिका
Prahlad Joshi: केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कांग्रेस पर देश में अराजकता फैलाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस यह कहकर कि वह कानून को नहीं मानती, एसआइआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के बहाने देश में अव्यवस्था पैदा करने का प्रयास कर रही है। रविवार को मीडिया से बातचीत के दौरान जोशी ने कहा कि दिल्ली में शनिवार को हुआ प्रदर्शन कोई न्यायसंगत आंदोलन नहीं था, बल्कि अराजकता फैलाने का प्रयास था।
उन्होंने आरोप लगाया कि देश का संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था सर्वोच्च है। वहीं एसआइआर की प्रक्रिया निष्पक्ष और पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित की जा रही है। इसके बावजूद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की ओर से इसका विरोध करना देश में अव्यवस्था पैदा करने की कोशिश है। जोशी ने कहा कि सरकार देश में अराजकता फैलाने की कोशिशों को देखकर चुप नहीं बैठ सकती। ऐसी स्थिति में आवश्यक कदम उठाने पड़ते हैं। इसी के तहत अराजकता को रोकने और नियंत्रित करने के लिए सरकार ने शनिवार को न्यूनतम आवश्यक कार्रवाई की।
जोशी ने दावा किया कि वर्तमान प्रक्रिया के दौरान लगभग तीन करोड़ मृत मतदाताओं के नाम और करीब तीन करोड़ दोहरे, फर्जी मतदाताओं के नाम सामने आए हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या इन सभी नामों को मतदाता सूची में शामिल रखा जाना चाहिए? उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मांग है कि एसआइआर के तहत करीब 13 करोड़ ऐसे मतदाताओं के नाम फिर से जोड़े जाएं, जिनका पता नहीं चल पा रहा है। जोशी के अनुसार, इनमें मृत व्यक्ति, दूसरे स्थानों पर जा चुके लोग, फर्जी मतदाता और अवैध प्रवासी जैसे अपात्र लोग भी शामिल हो सकते हैं। ऐसे सभी नामों को सूची में शामिल करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि इनमें कोई वास्तविक और पात्र मतदाता है, तो उसे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपने विवरण में सुधार कराने का खुला अवसर चुनाव आयोग ने दिया है।
जोशी ने डीके शिवकुमार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि एसआइआर के मुद्दे पर वे अपने नेता राहुल गांधी को खुश करने के लिए तरह-तरह के प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में 50 लाख मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश का आरोप लगाया जा रहा है, लेकिन जोशी के दावे के अनुसार राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि केवल 90 हजार मतदाताओं के नाम अपात्रों की सूची में हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एसआइआर की नीति और नियम केंद्र स्तर पर निर्धारित किए गए होंगे, लेकिन कर्नाटक में इसे लागू करने वाले अधिकारी तहसीलदार, सहायक आयुक्त और उपायुक्त जैसे राज्य सरकार के अधीन काम करने वाले अधिकारी हैं। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि इसमें केंद्र की साजिश कहां है? जोशी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी को विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है और इसके लिए पर्याप्त अवसर भी हैं, लेकिन यह कहना कि हम भारतीय कानून को नहीं मानेंगे और संविधान का पालन नहीं करेंगे, अराजकता पैदा करने की मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने दोहराया कि एसआइआर का विरोध करने के नाम पर देश में अव्यवस्था फैलाने की कोशिशों को सरकार बर्दाश्त नहीं कर सकती।
Updated on:
11 Oct 2026 09:16 pm
Published on:
11 Oct 2026 09:10 pm
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