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क्या नशा बनेगा पंजाब चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा? AAP के खिलाफ BJP, कांग्रेस और SAD ने खोला मोर्चा

2027 Punjab Election : पंजाब में विधानसभा चुनाव भले ही 2027 में होने हैं, लेकिन नशे का मुद्दा अभी से सियासी केंद्र में आ गया है। संगरूर के दिड़बा निवासी 47 वर्षीय दलित व्यक्ति गुलजार सिंह की मौत के बाद इस मुद्दे ने एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज कर दी है।
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भारत

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kamlesh sharma

•

Sep 29, 2026

Punjab Election

पंजाब में विधानसभा चुनाव (Photo-IANS/X-BJP-Congress)

नई दिल्ली। पंजाब में विधानसभा चुनाव भले ही 2027 में होने हैं, लेकिन नशे का मुद्दा अभी से सियासी केंद्र में आ गया है। संगरूर के दिड़बा निवासी 47 वर्षीय दलित व्यक्ति गुलजार सिंह की मौत के बाद इस मुद्दे ने एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज कर दी है। गुलजार सिंह के परिवार का आरोप है कि उन्होंने क्षेत्र में नशे की आसानी से उपलब्धता को लेकर पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से सवाल किए थे और इसके बाद वे मानसिक दबाव में आ गए। गुलजार सिंह की मौत से जुड़े उनके आखिरी रिकॉर्ड किए गए शब्दों को लेकर विपक्षी दलों ने भगवंत मान सरकार पर निशाना साधा है। भाजपा, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल ने पंजाब में नशे की समस्या पर सरकार को घेरा है। वहीं आम आदमी पार्टी ने पलटवार करते हुए विपक्षी दलों के शासनकाल में नशे की स्थिति और उनके रिकॉर्ड पर सवाल उठाए हैं।

भाजपा ने शुरू की 'नशा मुक्त यात्रा'

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब में नशे के खिलाफ सबसे बड़ा राजनीतिक अभियान फिलहाल भाजपा की ओर से चलाया जा रहा है। पंजाब भाजपा ने 18 सितंबर को 13 दिवसीय 'नशा मुक्त यात्रा' शुरू की। पार्टी ने इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राज्यव्यापी अभियान के तौर पर आगे बढ़ाया है। भाजपा ने अभियान को चार यात्राओं में बांटा है, जो करीब 4,000 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों से होकर गुजरेंगी। यात्रा का समापन 30 सितंबर को प्रस्तावित है। समापन कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के शामिल होने की संभावना है। भाजपा के कई केंद्रीय मंत्री और अन्य राज्यों के पार्टी के मुख्यमंत्री भी इस अभियान में हिस्सा ले रहे हैं।

चार सप्ताह से छह महीने तक के वादे

पंजाब की राजनीति में नशे का मुद्दा नया नहीं है। 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सत्ता में आने पर चार सप्ताह के भीतर नशे के कारोबार की रीढ़ तोड़ने का वादा किया था। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनका वादा नशे की आपूर्ति व्यवस्था को खत्म करने से जुड़ा था, न कि एक महीने में हर तरह के नशे को पूरी तरह खत्म करने से। 2022 के चुनाव में तस्वीर बदल गई। तब आम आदमी पार्टी विपक्ष में थी और उसके नेताओं, जिनमें अरविंद केजरीवाल भी शामिल थे, ने सरकार बनने के तीन से चार महीने के भीतर नशे की समस्या से निपटने का वादा किया था।

अब भाजपा ने भी नशे के खिलाफ अपनी रणनीति में समयसीमा का मुद्दा उठाया है। पार्टी की ओर से नशे की समस्या को खत्म करने के लिए दो साल की समयसीमा की बात कही गई है। वहीं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दावा किया है कि भाजपा को सत्ता मिली तो छह महीने में नशे के पूरे नेटवर्क को खत्म कर दिया जाएगा।

कांग्रेस और अकाली दल भी सरकार पर हमलावर

नशे के मुद्दे पर कांग्रेस भी आम आदमी पार्टी सरकार को घेर रही है। पार्टी के प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट के नेतृत्व में कांग्रेस ने गुलजार सिंह की मौत के मामले को लेकर पंजाब के मंत्री हरपाल सिंह चीमा के खिलाफ प्रदर्शन किया। पायलट ने आरोप लगाया कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों को दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने AAP के पुराने तीन महीने में नशा खत्म करने के वादे का भी जिक्र किया और कहा कि सरकार इस मुद्दे पर सवालों के घेरे में है। विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने पंजाब सरकार के साथ केंद्र सरकार को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि राज्य की नशे की समस्या को लेकर पंजाब और केंद्र के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बजाय नशे की आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ने के लिए कार्रवाई जरूरी है।

शिरोमणि अकाली दल भी इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है। अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने तंज कसते हुए कहा कि AAP सरकार के कार्यकाल में खाने से ज्यादा तेजी से नशे की डिलीवरी हो रही है। वहीं बठिंडा सांसद हरसिमरत कौर बादल ने पंजाब की महिलाओं से नशे के खिलाफ आंदोलन खड़ा करने और 'ठिकरी पहरा' जैसे सामुदायिक निगरानी उपाय अपनाने की अपील की है।