
गुलजार सिंह की मौत के पंजाब में क्यों मचा सियासी बवाल (सोर्स- एक्स यूजर /@Rattandeep Singh Dhaliwal और SK Chakraborty)
Punjab Election: पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ड्रग्स का मुद्दा एक बार फिर सियासत के केंद्र में आ गया है। BJP ने ‘नशा मुक्त यात्रा’ के जरिए अभियान तेज किया है, जबकि कांग्रेस AAP सरकार के पुराने वादों को लेकर सवाल उठा रही है। वहीं, AAP ने पलटवार करते हुए सत्ता में रह चुकी BJP और कांग्रेस के रिकॉर्ड पर सवाल खड़े किए हैं।
संगरूर जिले के दिर्बा के रहने वाले 47 वर्षीय गुलजार सिंह के आखिरी शब्द आज पंजाब की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बन चुके हैं। गुलजार सिंह ने कहा कि सरपंच भी मेरी मौत के लिए जिम्मेदार है। मैंने चीमा से ड्रग्स के बारे में सवाल किया था। मेरा बेटा ड्रग्स लेता है। मेरा घर बिक गया। मेरे पास कुछ भी नहीं है और आखिरकार अब मैंने जहर खा लिया है। पंजाब में ड्रग्स की समस्या कहीं भी हल नहीं हुई है। इस घटना के बाद से ही पंजाब में विपक्ष आक्रामक हो गया है।
पंजाब के राजनीतिक इतिहास में ड्रग्स हमेशा से बड़ा चुनावी मुद्दा रहा है। हर बार नेता और वादे बदलते हैं, लेकिन जमीन पर हकीकत जस की तस नजर आती है। 2017 के दौर में कांग्रेस नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हाथ में गुटका साहिब लेकर 4 हफ्तों में राज्य से नशे के नेटवर्क की कमर तोड़ने की कसम खाई थी। 2022 के दौर में सत्ता में आने से पहले आम आदमी पार्टी ने 3 से 4 महीने के भीतर नशे को जड़ से खत्म करने का दावा किया था। अब 2027 की तैयारी के बीच बीजेपी 6 महीने से 2 साल के भीतर पंजाब को पूरी तरह ‘नशा मुक्त’ करने की समयसीमा की बात कर रही है।
राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी बीजेपी ने इस मुद्दे पर सबसे बड़ा दांव खेला है। 18 सितंबर से शुरू हुई 13 दिवसीय 'नशा मुक्त यात्रा' राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों से होकर गुजर रही है। करीब 4,000 किलोमीटर का सफर तय करने वाली इस यात्रा का समापन 30 सितंबर को एक विशाल रैली के साथ होगा, जिसे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संबोधित कर सकते हैं। हालांकि, AAP भी बीजेपी को उनके 2007 से 2017 तक के अकाली-बीजेपी गठबंधन शासन की याद दिलाकर घेर रही है।
आंतरिक गुटबाजी से जूझ रही पंजाब कांग्रेस को इस मुद्दे ने एकजुट होने का मौका दे दिया है। राजस्थान के दिग्गज नेता और पंजाब कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट की अगुवाई में पार्टी ने संगरूर घटना के विरोध में बड़ा प्रदर्शन किया। कांग्रेस अब AAP के उन पुराने वादों को हथियार बना रही है, जो उसने सत्ता में आने से पहले जनता से किए थे।
पंजाब की सियासत में ‘ड्रग्स’ एक ऐसा चक्रव्यूह बन चुका है, जिसमें हर दल फंसा हुआ है। AAP पर वादाखिलाफी का आरोप है, तो उसके पास बचाव के लिए अपनी 5 साल की सरकार का रिपोर्ट कार्ड है। कांग्रेस अगर AAP पर निशाना साधती है, तो जनता उनसे उनके 4 हफ्ते वाले वादे का हिसाब मांगती है। वहीं, BJP अगर इस मुद्दे पर आक्रामक होती है, तो विरोधी उसे अकाली दल के साथ रहे 10 साल के शासनकाल की याद दिलाते हैं।
Updated on:
29 Sept 2026 01:33 pm
Published on:
29 Sept 2026 01:17 pm
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