
सुशील कुमार शिंदे और पीएम मोदी। फाइल फोटो- पत्रिका
Shikhar Pahariya Modi Banner: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार शिंदे ने अपने नाती शिखर पहाड़िया के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर बधाई वाले बैनर लगाने का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि एक दिन ऐसा करने से क्या बिगड़ गया। इससे किसी की विचारधारा नहीं बदल जाती। शिंदे ने भाजपा में शामिल होने की चर्चाओं पर भी अपनी बात रखी और साफ कहा कि वह कांग्रेस में ही रहकर काम करेंगे।
शिखर पहाड़िया की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर बधाई संदेश वाले बैनर लगाए जाने की खबर सामने आने के बाद शिंदे ने यह बयान दिया। उन्होंने कहा कि वह भी हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी से मिले थे। किसी को शुभकामनाएं देने या उनसे मिलने से विचारधारा नहीं बदलती। शिंदे ने कहा कि उन्हें भी कई बार भाजपा में आने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया कि वह कांग्रेस में हैं और वहीं काम करेंगे। उन्होंने कहा कि जब मैं कांग्रेस में हूं तो भाजपा में आकर क्या करूंगा? मैं वहीं काम करूंगा, जहां हूं। भाजपा में आकर आपके काम में दखल क्यों दूं?
सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि भाजपा में शामिल होने वाले नए नेताओं की स्थिति भी उन्होंने देखी है। करीब 25 साल पहले भी ऐसा ही हुआ था। उस समय कई नेता अपने दल छोड़कर चले गए थे, लेकिन चार से पांच साल में उनमें से कई वापस लौट आए थे। उन्होंने कहा कि राजनीति में भी गलतियां होती हैं। पत्रकारों को ऐसी घटनाओं का विश्लेषण करना चाहिए। अगर किसी से अनजाने में गलती हुई है तो उसे समझना चाहिए। लोकतंत्र पर कोई दाग नहीं लगना चाहिए।
शिंदे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनसे जितनी बातचीत करते हैं, उतनी ही शरद पवार से भी करते हैं। शरद पवार प्रधानमंत्री को बारामती भी ले जाते हैं। ऐसे कार्यक्रमों में शामिल होने या मुलाकात करने से कुछ गलत नहीं होता। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के कुछ काम अच्छे होते हैं, तो कुछ कामों पर सवाल भी उठते हैं। पत्रकारों को इन सभी बातों का विश्लेषण करना चाहिए।
शिंदे ने बताया कि कुछ समय पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की एक किताब प्रकाशित हुई थी। उन्होंने उसे पढ़कर देखा था। उन्होंने कहा कि राजनीति विज्ञान के विद्यार्थी के रूप में अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं को समझना जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता सोलापुर आए थे। उन्होंने उन नेताओं के बारे में जानकारी ली और कम्युनिस्ट पार्टी का साहित्य भी पढ़ते हैं। उनके अनुसार, कम्युनिस्ट पार्टी का इतिहास भी काफी बड़ा है।
Updated on:
23 Oct 2026, 6:33 PM IST
Published on:
23 Oct 2026, 6:33 PM IST
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