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DGHS मेडिकल खरीद घोटाला मामले में राजीव रंगीला को बड़ा झटका, अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा

DGHS Medical Procurement Scam: डीजीएचएस मेडिकल खरीद घोटाला मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने राजीव रंगीला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। चार दिन की एसीबी हिरासत पूरी होने के बाद उसे अदालत में पेश किया गया था।
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DGHS Medical Procurement Scam

प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली। डीजीएचएस मेडिकल खरीद घोटाला मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने राजीव रंगीला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। चार दिन की एसीबी हिरासत पूरी होने के बाद उसे अदालत में पेश किया गया था। अदालत ने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। अब उसे न्यायिक हिरासत की अवधि पूरी होने के बाद 13 अक्टूबर को अदालत में पेश किया जाएगा।

फर्जी कंपनियां बनाईं

गौरतलब है कि करीब 700 करोड़ रुपए के मेडिकल उपकरण खरीद घोटाले में एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) ने कथित मास्टरमाइंड राजीव रंगीला को गिरफ्तार किया था। रंगीला एसीबी के सामने सरेंडर करने पहुंचा था। जांच के मुताबिक रंगीला ने दूसरे लोगों के नाम पर फर्जी कंपनियां खड़ी की थीं। इनमें नौकरों और चाय बेचने वालों तक को कंपनी का मालिक बताया गया, जबकि इन कंपनियों का वास्तविक संचालन रंगीला ही करता था। जांच में एफ मेड डिवाइसेस, टेक्नोक्रेट्स, राज श्री, आशी सर्जिकल एंड फार्मास्युटिकल और एम साहिब एंड संस प्राइवेट लिमिटेड समेत कई कंपनियों के नाम सामने आए हैं।

मेडिकल उपकरण बनाने वाली कंपनियों के साथ मिलीभगत

सूत्रों के अनुसार, रंगीला ने मेडिकल उपकरण बनाने वाली कंपनियों के साथ कथित मिलीभगत कर सप्लाई के रेट तय कराने की व्यवस्था की। आरोप है कि तय रकम में से कुछ हिस्सा नकद किकबैक के रूप में वापस करने की व्यवस्था भी की जाती थी। जांच में यह भी आरोप सामने आया कि निर्माताओं के साथ मिलकर ऐसे प्रतिबंधात्मक स्पेसिफिकेशन तैयार किए जाते थे, जिससे खास कंपनियों को टेंडर प्रक्रिया में फायदा मिल सके। इसके बाद संबंधित दस्तावेज सीपीए के हेड ऑफ ऑफिस डॉ. विनोद कुमार रंगा तक पहुंचते थे। वह इन दस्तावेजों को टेंडर कमिटी के समक्ष रखते थे।

मई में सामने आया था घोटाला

डॉ. विनोद कुमार रंगा इस मामले में 18 जून को गिरफ्तार होने वाले पहले आरोपी थे। यह घोटाला इस साल मई में सामने आया था। विजिलेंस विभाग की शिकायत के आधार पर एसीबी ने 2 जून को एफआईआर दर्ज की थी। करीब एक सप्ताह पहले एसीबी ने राजीव रंगीला समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की थी। सूत्रों के मुताबिक, एसीबी ने रंगीला को जुलाई में पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन कई नोटिस जारी होने के बावजूद वह जांच में शामिल नहीं हुआ था। कोर्ट उसे भगोड़ा घोषित कर चुका था और अक्टूबर के पहले सप्ताह में उसकी संपत्तियां जब्त करने की तैयारी थी।